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Tuesday, October 20, 2020

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ग्रामीण भारत में बिजली के स्मार्ट मीटर लगने से सबको फायदा: ADB

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) सैटेलाइट आधारित स्मार्ट मीटर परियोजना का विस्तार करने की योजना बना रहा है. फिलहाल इस परियोजना का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश के एक गांव में किया जा रहा है.

एडीबी का कहना है कि यह उपभोक्ताओं से लेकर बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) सहित सभी के लिए फायदे की परियोजना है.

एनर्जी एफिशियंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को 20 करोड़ डॉलर के कर्ज के तहत देश में कई मांग पक्ष आधारित ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है. इसी के तहत एडीबी की मदद वाली पायलट परियोजना वाराणसी के एक गांव में चलाई जा रही है. इसके तहत 5 हजार परिवारों को सैटेलाइट संचार प्रौद्योगिकी वाले स्मार्ट मीटर मिले हैं. यह प्रौद्योगिकी ईईएसएल ने लगाई है.

एडीबी के यांगपिंग जाई ने एक ब्लॉग में लिखा है कि प्रस्तावित दूसरी योजना के तहत एडीबी इस परियोजना का विस्तार कर रहा है.

यांगपिंग ऊर्जा क्षेत्र के समूह के प्रमुख हैं.

स्मार्ट मीटर से 4 प्रमुख अंशधारकों को फायदा

उन्होंने कहा कि हमने देखा है कि स्मार्ट मीटर से 4 प्रमुख अंशधारकों को फायदा होता है.

स्मार्ट मीटर के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए बिजली की गुणवत्ता सुधरती है. बिजली कटौती की अवधि घटती है और बिल भुगतान के लचीले विकल्प उपलब्ध होते हैं.

स्मार्ट मीटर से मोबाइल एप के जरिए बिजली के इस्तेमाल के बारे में तत्काल जानकारी मिलती है. ऐसे में उपभोक्ता बिजली की बर्बादी को रोक सकता है और बचत कर सकता है.

उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के जरिए डिस्कॉम सही बिल भेज सकती हैं क्योंकि इसमें मानव हस्तक्षेप नहीं होता. उपभोक्ता के बिल नहीं चुकाने पर वो दूर बैठकर भी उसका बिजली का कनेक्शन काट सकती हैं. उन्होंने कहा कि इससे बिजली वितरण कंपनियों के तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान में क्रमश: 30 और 15 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है. साथ ही वो अपनी बिजली खरीद जरूरत का अनुमान लगा सकती हैं और बिजली का अधिक महत्तम तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित कर सकती हैं.

स्मार्ट मीटर की खरीद का खर्च करीब 35 डॉलर यानी 2,560 रुपए है. इसी तरह 5 साल के लिए इसे लगाने का खर्च भी 35 डॉलर का है.

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