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Tuesday, October 27, 2020

दिल्ली कोर्ट ने महिला को अपने ट्रांसजेंडर साथी के साथ रहने की इजाजत दी

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दिल्ली कोर्ट ने महिला को अपने ट्रांसजेंडर साथी के साथ रहने की इजाजत दी

बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक व्यस्क स्त्री पर किसी तरह की कोई बंदिश नहीं लगाई जा सकती है. इसके साथ ही कोर्ट ने अपनी शादी से नाखुश महिला को एक ट्रांसजेंडर मित्र के साथ रहने की इजाजत भी दी.

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और संगीता धिंगरा सहगल की डिवीजन बेंच ने ट्रांसजेंडर याचिकाकर्ता की याचिका को स्वीकार कर लिया. याचिकाकर्ता जन्म से महिला थी लेकिन अब पुरुष है. उन्होंने याचिका दी थी कि स्त्री को अपनी मर्जी के साथी के साथ रहने की इजाजत दी जाए. बजाए इसके कि जिसने उसे जबरदस्ती अपने पास रखा हुआ है.

कोर्ट ने इसके बाद अपने आदेश में कहा कि महिला अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है. उसे अपनी मर्जी के साथी के साथ रहने का हक है. और इसमें न तो कोर्ट और न ही पुलिस किसी तरह का दखल दे सकती है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक महिला के अभिभावक और पति ने ट्रांसजेंडर महिला की याचिका का विरोध किया था. लेकिन फिर भी कोर्ट ने कहा कि वो एक वयस्क महिला की इच्छा को तब तक रोक नहीं सकते जब तक कि यह अवैध न हो.

महिला ने कोर्ट को बताया कि उसे उसके माता पिता की तरफ से किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है और उसे सुरक्षा की जरुरत नहीं है. याचिकाकर्ता ने महिला के लिए सुरक्षा की भी गुहार लगाई थी.

याचिकाकर्ता ने Habeas Corpus:

दिल्ली पुलिस द्वारा महिला को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता ने कोर्ट में अपील की थी कि महिला को सशरीर कोर्ट के सामने लाया जाए और उसे सुरक्षा प्रदान की जाए. पीड़िता ने अपने पति के खिलाफ घरेलु हिंसा का केस भी दायर कर रखा था. लेकिन जैसे ही वो महिला ट्रांसजेंडर साथी के साथ रहने लगी तो 6 नवंबर को महिला के पिता कई रिश्तेदारों के साथ आए और उसे अपने साथ जबरदस्ती ले गए. उसने पुलिस पर भी महिला के माता-पिता का साथ देने का आरोप लगाया.

वहीं महिला के माता पिता का कहना था कि बेटी के इस कदम से उन्हें समाज में शर्मिंदा होना पड़ा.

 

 

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