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अक्‍सर ही लोग मंदिरों में मां से अपनी बंद किस्‍मत के ताले खोलने की मन्‍नतें तो करते हैं। लेकिन क्‍या आपने यह सुना है कि कोई मंदिर में ताले ही लगाकर अपनी मन्‍नत मांगे। जी हां ऐसा ही एक मंदिर है कानपुर के बंगाली मोहाल मोहल्‍ले में और यह मंदिर भारत के अनोखे मंदिरों में से एक है। यह कब बना और किसने बनवाया? ये कोई नहीं जानता। मंदिर में मां काली की मूर्ति स्‍थापित है। आइए जानते हैं…

तो यूं लगा था मुरादों का पहला ताला
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि दशकों पहले एक रोज ही मां की पूजा के लिए मंदिर आती थी। पूजा-आरती तो उसका रोज का नियम था लेकिन एक रोज किसी ने देखा कि वह मंदिर में ताला लगा रही थी। तो उसने जाकर पूछा कि आखिर वह ताला क्‍यों लगा रही है तब महिला ने जवाब दिया कि उसे सपने में मातारानी ने दर्शन दिया था और ताला लगाने को कहा है। उन्‍होंने कहा कि इसे मेरी मुरादें पूरी हो जाएंगी और सारी समस्‍याएं दूर हो जाएंगी। इसके बाद वह कभी भी मंदिर परिसर में नजर नहीं आई। लेकिन कई सालों बाद वह ताला मंदिर से गायब था और दीवार पर लिखा था कि उसकी मुराद पूरी हो गई है इसके लिए ही उसने ताला खोल दिया है और उसे अपने साथ ले जा रही है।

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यूं नहीं खुलता मन्‍नतों का यह ताला
बताते हैं कि मन्‍नतें पूरी होने के बाद भक्‍त पूरे विधि-विधान से मां की पूजा- अर्चना करते हैं और फिर ताला खोलते हैं। इसके बाद वह दीवार पर अपनी मुराद पूरी होने की भी बात लिखते हैं। बता दें कि भारत के कोने-कोने से यहां पर भक्‍त आते हैं और बंद किस्‍मत का ताला खुलने की अर्जी लग‍ाकर मंदिर में ताला बंद करके लगाते हैं। इसके बाद जैसे ही अर्जी पूरी होती है वह ताला खोलकर दीवार पर लिखते हैं।

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मां नहीं करवाती ज्‍यादा इंतजार
पुजारी और भक्‍तजन बताते हैं कि मंदिर में मन्‍नतों का ताला जब लगता है तो मां भी अपने भक्‍तों की किस्‍मत के ताले जल्‍दी ही खोल देती हैं। यही वजह है कि मन्‍नत पूरी होते ही भक्‍त जल्‍दी से जल्‍दी इस ताले को खोलने के लिए आते हैं। हालांकि मंदिर कब और किसने बनवाया? यह कोई नहीं जानता। पुजारी भी बताते हैं कि उन्‍हें भी उनके पुरखों ने बताया है कि यह मंदिर दशकों पहले स्‍थापित हुआ था।

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