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झारखंड के पूर्वी सिंहभूमि जिले के चाकुलिया के बीडीओ लेखराज नाग को रोज देसी मुर्गा चाहिए। वह भी छोटे साइज का। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात यह है कि मुर्गा उन्हें मुफ्त में चाहिए। और मुर्गा उपलब्ध कराने की जवाबदेही प्रखंड के कर्मचारियों की है। नहीं देने पर कर्मचारियों को नौकरी से भी हाथ धोना पड़ रहा है। जिनसे मांग होती है, वे स्थायी कर्मचारी भी नहीं हैं। बल्कि कम वेतन वाले अनुबंधकर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर हैं। उनका ऐसे ही एक कंप्यूअर ऑपरेटर विक्रम उपाध्याय के साथ मोबाइल पर बातचीत का एक ऑडियो क्लिप शुक्रवार को वायरल हो गया। यह ऑडियो 20 जून का बताया जाता है। 

इसमें वे कर्मचारी से छोटे साईज का देसी चिकन लाने का फरमान देते सुनाई देते हैं। हालांकि विक्रम रोज-रोज की मांग से आजिज आकर मुर्गा लाने से इनकार कर देता है। इसके कारण बीडीओ साहब उसी दिन से ड्यूटी पर नहीं आने का फरमान सुना देते हैं। इस क्लिप में जब विक्रम यह कहता है कि वह चिकन नहीं ला सकता है। रोज-रोज उसे ही कहा जाता है, तो बीडीओ कहते हैं कि पांडेय जी भी लाते हैं। खोखन भी लाता है। 
 

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इस मामले में नौकरी से निकाले गए चाकुलिया निवासी विक्रम उपाध्याय का कहना है कि बीडीओ ऑफिस के साथ-साथ अपने घर का भी काम करवाते हैं। सब्जी आदि लाना पड़ता है। जो कर्मचारी ऐसे काम करने से इनकार करता है उसे मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वह खुद ही इस्तीफा देकर चला जाता है। पूर्व में कई कर्मचारी काम छोड़ चुके हैं, उसका ऐसा दावा है। इसलिए उसने सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है। 

चाकुलिया बीडीओ लेखराज नाग ने बताया कि विक्रम उपाध्याय का आरोप निराधार है। उसे कार्यालय की गोपनीय बातें सार्वजनिक करने के कारण निकाला गया है, न कि देसी चिकन नहीं लाने की वजह से। फिलहाल 8 कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यालय में हैं। एक अन्य ऑपरेटर को भी बैठाया गया है। 

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