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आदिवासी विकास विभाग की ओर से संचालित आदिवासी छात्रावासों एवं आश्रमशालाओं में मूलभूत सुविधाओं के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। लेकिन सरकार के बड़े बड़े दावे कितने सही साबित होते हैं, यह उस समय पता चलता है, जब पालघर के आदिवासी आश्रमशाला के हालातों का जायजा लिया जाता है। अखबारों की सुर्खियां बटोरने वाली पालघर जिले की आदिवासी आश्रमशाला एक बार फिर से चर्चा में है। यहां फैली अव्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायत करने के बावजूद विद्यार्थियों को राहत मिलती नहीं दिख रही।

पालघर में गिरते तापमान के बाद आश्रमशालाओं की बदहाली को लेकर राजनीतिक पारा बढ़ता जा रहा है। आदिवासी विभाग के मंत्री विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। बोईसर के करीब बेटेगांव के पास स्थित आदिवासी आश्रमशाला के छात्र मूलभूत जरूरतों के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं। ठंडी के मौसम में पालघर का तापमान जहां लगातार गिर रहा है तो वहीं छात्रों को आश्रमशाला में गर्म पानी के लिए लगाए गए सौर ऊर्जा यूनिट का भी फायदा नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा है कि सौर ऊर्जा यूनिट पिछले कई महीने से बंद पड़ा है, लेकिन प्रशासन उसकी मरम्मत नहीं करा रहा है।

लिहाजा छात्रों को ठंड में ही नदियों में नहाना पड़ता है। इतना ही नहीं, प्रदूषित पानी में रोज नहाने को विवश होना पड़ रहा है। छात्रावास में रहनेवाले कई छात्रों के बीमार होने की बात भी सामने आई है। आश्रमशाला में व्याप्त अव्यवस्था की खबर सामने आने के बाद विपक्षी दल भी जिले के पालक मंत्री विष्णु सावरा पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

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