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Thursday, April 2, 2020

जज लोया मामले की दोबारा नहीं होगी जांच! गृह मंत्री अनिल देशमुख बोले-नहीं मिले कोई ठोस सबूत

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जज लोया की मौत के मामले में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि कई लोगों ने मुझे फोन किया और दावा किया कि उनके पास मामले में नए सबूत हैं। मैंने उनसे कहा कि आओ और मुझसे मिलो लेकिन अब तक कोई भी ठोस सबूत नहीं लाया गया है। आपको बता दें कि मंत्री ने इससे पहले कहा था कि अगर उनके पास ठोस सबूत आते है तो यह मामला फिर से खुल सकता है। गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे न्यायामूर्ति लोया की एक दिसंबर 2014 को नागपुर में उस समय दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी, जब वह अपने एक सहयोगी की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे। 

इस मामले की सुनवाई के दौरान कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी एच लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब दायर करने को कहा था। शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि वह दिवगंत जज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखनी चाहती है। न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंपने को कहा। न्यायालय ने कहा कि यह गम्भीर मामला है और इसकी सुनवाई बिना दूसरे पक्ष को सुने नहीं की जा सकती।

लोया की एक दिसंबर 2014 को नागपुर में दिल का दौरा पड़ने से उस समय मौत हो गई थी जब वह अपनी एक सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए जा रहे थे। यह मामला तब सामने आया जब उनकी बहन के हवाले से मीडिया की खबरों में उनकी मौत और सोहराबुद्दीन से उसके जुड़े होने की परिस्थितियों पर संदेह जताया गया। गुजरात में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीदास प्रजापति के नवंबर 2005 में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में पुलिसकर्मी समेत कुल 23 आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे थे। बाद में यह मामला सीबीआई को सौंपा गया और मुकदमे को मुंबई स्थानांतरित किया गया। बॉम्बे लॉयर्स असोसिएशन ने आठ जनवरी को बंबई हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर न्यायाधीशों की मौत की जांच कराने की मांग की गई थी।

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