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Tuesday, October 27, 2020

धरती को सपाट मानने वाले मौसम विज्ञान से जुड़े तथ्यों को क्यों नहीं समझना चाहते

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बचपन से पढ़ते-सुनते आए हैं कि धरती गोल है। लेकिन दुनियां में सबके लिए नहीं। फ्लैट अर्थ थ्योरी के पक्षधर बिना किसी ठोस तर्क या तथ्य के पृथ्वी को सपाट साबित करने पर तुले हैं। भले ही जान चली जाए। ऐसी ही एक कोशिश में फ्लैट थ्योरी के समर्थक स्टंटबाज मैड मैक्स ह्यूजेस की रॉकेट से प्रयोग के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई। जानते हैं मौसम विज्ञानी क्या कहते हैं इस बारे में-

वातावरणीय दबाव के सिद्दांत को समझना होगा। गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रत्येक वायु कण धरती के भार के केंद्र की तरफ आकर्षित होते हैं। चूंकि पृथ्वी गोल है इसलिए वातावरण उसके इर्दगिर्द रहता है। यह पृथ्वी के केंद्र की तरफ खिंचता है लेकिन धरती की सतह उसे रोक लेती है। द्रव्य स्थैतिक संतुलन से वायु दाब और ऊंचाई का नियंत्रण बना रहता है। इसलिए हम जहां भी रहते हैं वायु दाब सहने योग्य सीमा में रहता है। फ्लैट अर्थ थ्योरी के अनुसार अनियंत्रित रूप से वायु प्रवाह धरती के केंद्र मंडल की ओर होगा। इससे वायुदाब शून्य या वातावरण रहित होगा। यह केंद्र मंडल में सर्वाधिक से मध्य हिस्से में कम होता जाएगा। ऐसी स्थिति में यदि आप ऑस्ट्रेलिया या सुदूरवर्ती दक्षिण अमरीका में रहते हैं तो वहां ऑक्सीजन की कमी से आपका दम घुटेगा। यदि उत्तरी ध्रुव की तरफ रहते हैं तो वातावरणीय दाब सहना नामुमकिन होगा। सपाट होने पर इसका मौसमी धाराओं की जेट स्ट्रीम और समुद्री तूफानों पर भी असर होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी और बर्फ पर आयोजित होने वाले खेल २०५० तक ५० फीसदी तक घट जाएंगे।

सूर्य कभी अस्त नहीं होगा
फ्लै ट थ्योरी के मुताबिक सूर्य 51 किमी चौड़ा (ह्यूस्टन शहर के व्यास बराबर) और धरती के 4828 किमी ऊपर परिक्रमा करता है। यदि ऐसा है तो सूर्य सपाट सतह पर कैसे अस्त होगा। इस गणित से तो उसका विकिरण सब जला देगा। वक्रीय पृथ्वी की तुलना में सपाट का disc (मंडल) का ढाई गुना सतही क्षेत्रफल अधिक होगा। यदि मौजूदा भूगोल बराबर ही सतही क्षेत्रफल व उतनी ही सौर ऊर्जा मानें तो आग जैसी गर्मी से कोई जिंदा नहीं बच पाएगा। सपाट सतह का असर चंद्र ग्रहण पर भी होगा। थ्योरी के अनुसार धरती पर सबको एक ही समय पर अलग अलग चंद्र कलाएं देखने को मिलती।

उत्तरी ध्रुव बनेगा केन्द्र
सपाट पृथ्वी का मतलब है कि गुरुत्वाकर्षण ग्रह के मध्य में होगा। फ्लैट थ्योरी के अनुसार यह हिस्सा उत्तरी ध्रुव होगा और इससे बारिश, ओले और ऐसी मौसमी घटनाएं उसी तरफ होंगी। इससे वहां भयंकर वायुदाब होगा। आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक आद्र्रता होगी। महासागरों का स्तर बढ़ेगा। उत्तरी ध्रुव जम जाएगा। भूवैज्ञानिक इस थ्योरी को नकारते हैं क्योंकि पृथ्वी का केंद्र ऐसे खनिज-धातुओं से बना है जो इसके गुरुत्वाकर्षण को धरती के केंद्र तक बनाए रखते हैं। ऐसे में सपाट पृथ्वी का सिद्दांत इसके गुरुत्वाकर्षण के नियम को भी नकार देता है। यह निराधार है।

दक्षिण ध्रुव को भूले?
फ्लैट थ्योरी में उत्तरी ध्रुव का जिक्र है पर उनकी नजर में दक्षिण ध्रुव नहीं है। वे मानते हैं कि दुनिया का दक्षिणी सिरा बर्फ से ढंका अंटार्कटिका ही है। धरती का चुंबकीय क्षेत्र भी दोनों ध्रुवों में बंटा है। यदि उत्तरी ध्रुव है तो इसके नीचे दक्षिण होना चाहिए और चुंबकीय क्षेत्र अंटर्काटिका में नहीं, यहीं होना चाहिए। इसे सपाट थ्योरी वाले तार्किकता से नहीं बता पाए। यदि वे धरती के कोर (भूगर्भीय केंद्र) को न मानकर, घूमते चुंबकीय कोर को मानते हैं तो इसके 1200 किमी चौड़े भार (Mass) को कहां रखेंगे?

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