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Wednesday, June 3, 2020
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..तो बेहाल होती मुम्बई, कीमत चुकाता पूरा देश

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चेतावनो भरा बैनर

मुम्बई: तबलीगी जमात के कार्यक्रम ने देश के होश उड़ा दिए हैं।कोरोना वायरस महामारी का रूप ले रही थी तो दूसरी ओर लोग उसके खतरे से बेखबर होकर जमावड़ा करते गए।जिसका परिणाम यह हुआ कि दिल्ली में हुए एक आयोजन ने पूरे देश पर संकट ला दिया ।

महाराष्ट्र भी इससे अछूता न होता, अगर समाजसेवियों और विभिन्न सँगठनों द्वारा कार्यक्रम को रद्द किए जाने के आग्रह को शासन-प्रशासन द्वारा अनदेखा किया गया होता।

आपको बता दें कि पालघर जिले के वसई पश्चिम स्थित सन सिटी में 14 मार्च को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हजारों की भीड़ जुटने वाली थी ,जिसके लिए शमीम एज्युकेशन अॅन्ड वेलफेअर सोसायटी ने तहसीदार और वसई विरार मनपा ने परमिशन की मांग की थी और परमिशन मिल भी गयी।

महानगपालिका द्वारा जारी अनुमति पत्र

मौके पर टेंट लगाने ,गड्ढे खोदने, पेड़ों की छटाई कर उसे समतल करने का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी था।कार्यक्रम की तारीख नजदीक आ रही थी और तैयारियां जोरों पर थी। उधर बच्चों की बोर्ड की परीक्षाएं भी चल रही थी।काफी भीड़ होने पर ट्रैफिक की व्यवस्था बिगड़ने की भी संभावनाएं प्रबल थीं, साथ ही स्वास्थ्य को खतरा उतपन्न होता सो अलग।

शासन द्वारा जारी अनुमति पत्र

उधर कोरोना का संक्रमण भारत में भी पाँव पसार चुका था। ऐसे में वसई-विरार के समाजसेवियों को सम्भावित कार्यक्रम में होने वाली भीड़ और कोरोना के खतरे को लेकर काफी चिंता होने लगी।
ऐसे में विहिप जिलामंत्री , बजरंगदल जिला संयोजक ,शिवसेना के पदाधिकारियों ने पालघर एस पी गौरव सिंह व तहसीलदार से मिलकर सम्भावित संक्रमण के खतरे को देखते हुए कार्यक्रम रद्द करने का अनुरोध किया।जिसे गम्भीरता से लेते हुए शासन-प्रशासन द्वारा जारी अनुमति पत्र रद्द करते हुए कार्यक्रम न करने के निर्देश दिए गए।

गृहमंत्री ने जताया सन्तोष

शासनादेश का उल्लंघन करते हुए खोदे गए गड्ढे,काटे गए पेड़-पौधे

14 मार्च को आयोजित होने वाले उक्त कार्यक्रम की
तैयारियों की बात की जाए तो कार्यक्रम के लिए NGT की जमीन पर दी गयी अनुमति का घोर उल्लंघन करते हुए वहां जेसीबी चलाकर मौजूद पेड़ों की कटाई-छंटाई करते हुए ,तमाम बड़े-बड़े गड्ढे भी खोदे गए हैं । जो वर्तमान में देखे जा सकते हैं। आने वाली बारिश के पहले अगर ये गड्ढे न ढंके गए तो ये गड्ढे किसी की भी जान के लिए खतरा हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने इस पर कार्यवाही की मांग की है।

खोद कर छोड़े गए गड्ढे

फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की मनाही

शासन द्वारा अनुमति लेकर किये जा रहे इस सार्वजनिक कार्यक्रम में बाहरी लोगों , मीडिया या फिर अन्य किसी का आना सख्त मना था।साथ ही वहां फोटोग्राफी करने की भी सख्त मनाही थी।जिसे लेकर स्थानिक लोगों में काफी संशय था। कुछ लोगों ने हमारे संवाददाता को बताया कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में किसी को भी आने जाने पर रोक लगाया जाना अपने आप में संदेहास्पद है। इस पहलू पर भी जांच होनी चाहिए।

मनाही सम्बन्धित लगा पोस्टर

दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम की वजह से पूरे देश में खलबली मची है।कार्यक्रम समाप्ति के बाद उसमें शामिल जमाती अपने अपने गांव निकल गए लेकिन वो अपने साथ कोरोना संक्रमण भी ले गए हैं।

ऐसे लोगों के सम्पर्क में आने के बाद कुछ लोगों में कोरोना के लक्षण दिखने शुरू हो गए ,जिन्हें बाद में क्वारटाइन किया गया है।अगर ऐसी परिस्थिति महाराष्ट्र में हुई होती तो फिर स्थिति दयनीय हो सकती थी।

समाजसेवकों की प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर स्थानीय जागरूक लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि किसी भी बड़े आयोजन की अनुमति देने से पहले प्रशासन द्वारा उसकी पारदर्शिता सुनिश्चित कर ली जानी चाहिए। प्रशासन द्वारा कार्यक्रमों की पूरी वीडियोग्राफी की जानी चहिये जिससे किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि संचालित न की जा सके और समाज को सुरक्षित रखा जा सके।

कुल मिलाकर इस कार्यक्रम के रद्द होने बाद गृहमंत्रालय , शासन तथा प्रशासन सहित स्थानिक नागरिकों ने राहत की सांस ली है।

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