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Friday, May 29, 2020
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प्रधानमंत्री की ‘दिया जलाओ’ मंत्र से होगी लोगों की मनोचिकित्सा

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अवसाद और मनोविकारों को भगाएगा दूर, मानसिक से मुक्ति

भदोही, 05 अप्रैल । पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण से जूझ रही है। देश लॉक डाउन है। प्रधानमंत्री रविवार की रात 09 से नौ मिनट तक घरों की बत्ती बुझा दीप जलाने की अपील की है। प्रधानमंत्री की अपील की आलोचना भी हो रही है। लेकिन मनोवैज्ञानिक इसे सही फैसला मानते हैं। उनके विचार इससे यह फैसला सामूहिक मनोचिकित्सा के रुप में काम करेगा।

लॉक डाउन की वजह से लोग होने लगे हैं मनोविकार से ग्रस्त

काशी हिंदू विश्वविद्याय के एआरटी केंद्र में तैनात मनोचिकित्सक डा. मनोज तिवारी बताते हैं कि लॉक डाउन की वजह से तमाम लोग मनोवैज्ञानिक समस्याओं जैसे तनाव, दुश्चिंता, अवसाद, मनोदशा विकार, कार्य के प्रति अरुचि के लक्षण दिखाई पड़ने लगे थे। कुछ जगहों पर कोरोना संक्रमण के भय के कारण आत्महत्या कर रहे थे। यह प्रकाश उत्सव एक सामूहिक मनोचिकित्सा के रूप में कार्य करेगा। सामूहिक प्रकाश उत्सव एक ऐसा मनोचिकित्सा है जो सबसे कम समय में व सरल ढंग से किया जा सकता है। बिना खर्चे का प्रभावी उपाय है। नि:संदेह उपलब्ध विकल्पों में यह सबसे सर्वोत्तम है।

लाँकडाउन का आधा समय व्यतीत कर चुका होगा। इतने लंबे समय तक लोग घरों में रहते-रहते बोरियत महसूस करने लगे हैं। लोग अपना समय बिताने के लिए अनेक उपाय कर रहे हैं जिसकी चर्चा मीडिया में खूब चल रही है। धीरे-धीरे लोगों के दिमाग में अब कुछ नया करने की आइडिया खत्म हो रहा था। दिमाग में जो एक खालीपन आ गया कि अब क्या करें। अब रविवार तक इंतजार व मानसिक तैयारी में समय व्यतीत करेंगे, जो एक खालीपन उनके मन और मस्तिष्क में महसूस हो रहा था वह अब उन्हें नहीं सताएगा।

डा. मनोज के अनुसार सामूहिक प्रकाश उत्सव से देश के नागरिकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। सांवेगिक सहयोग महसूस करेंगे। इस सामूहिक प्रकाश उत्सव के द्वरा लोगों में जो हताशा व निराशा की भावना बढ़ने लगी थी वह कम होगी। नई उर्जा का संचार होगा जो देश के नागरिकों को आगे के लाँक डाउन के समय में व्यवहार को नियमित एवं संयमित रखने के काम आएगा। मनोविज्ञान में इसे अभिप्रेरित करना व पुनर्वलित करना कहा जाता है। प्रधानमंत्री जी ने पुनर्बलन का बखूबी उपयोग किया है जिससे देश के नागरिकों में अपेक्षित व्यवहार में वृद्धि होगी और
नकारात्मक भावना पर नियंत्रण होगा।

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