31 C
Mumbai
Friday, May 29, 2020
विज्ञापन
Loading...

भदोही : भगवान से मनाइए कि आपकी सांसों को न पड़े ‘वेंटीलेटर’ की ज़रूरत

विज्ञापन
Loading...

Must read

कर्ज देने को लेकर बैंकों को फिच की चेतावनी, दो साल में 6% तक बढ़ जाएगा एनपीए

फिच रेटिंग्स ने गुरुवार (28 मई) को एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी कि सरकार के करीब 20 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज...

कोरोना लॉकडाउन के कारण पाकिस्तान में फंसे 300 भारतीय शनिवार को स्वदेश लौटेंगे

भारत ने पाकिस्तान में कोरोना वायरस महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में फंसे अपने तीन सौ नागरिकों को वापस स्वदेश लौटने की अनुमति दे...
MCS Deskhttps://metrocitysamachar.com/
Latest Breaking News India, Express Headlines 2020, Political News - Metro City Samachar

हजारों करोड़ का कालीन निर्यात और कृतिम प्राणवायु की सुविधा तक उपलब्ध नहीँ

प्रभुनाथ शुक्ल / भदोही

भदोही, 22 मई । दुनिया में भदोही की अपनी अलग पहचान है। यहाँ खूब सूरत कालीन का निर्माण होता है। निर्यातकों और संस्थाओं का दावा है कि तकरीब दस हजार करोड़ का सालाना विदेशों में कालीन निर्यात होता है। लेकिन स्वास्थय सुविधाएँ ऊपर वाले के भरोसे हैं। कोरोना संक्रमण काल में सरकारी अस्पताल में वेंटीलेटर यानी (कृतिम स्वांसप्रणाली) की सुविधा तक उपलब्ध नहीँ है। सोचिए फ़िर हम इस महामारी से कैसे जंग लड़ पाएंगे। जबकि उस हालत में जब कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है।

वाराणसी को विभाजित कर 26 साल पूर्व 30 जून को भदोही जिले का निर्माण मुलायम सिंह यादव ने किया था। इस बीच एक पूरी पीढ़ी जवान हो चली है, लेकिन हमारी विकलांग व्यवस्था सरकारी अस्पताल को कृतिम स्वांस प्रणाली की सुविधा तक उपलब्ध नहीँ करा पाई है। यह यह है हमारे विकास का सुनहला पन्ना। जिला निर्माण के बाद तकरीब पांच सरकारें बदली लेकिन अभी तक यह सुविधा उपलब्ध नहीँ हो पाई।

भदोही को अभी तक जिला अस्पताल की सुविधा तक नहीँ मिल पाई है। ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल के रुप में काम कर रहा है। दूसरा बड़ा अस्पताल भदोही स्थित महाराजा बलवंत सिंह चिकित्सालय है। दोनों अस्पताल सिर्फ खांसी- जुकाम तक सीमित हैं। गम्भीर बीमारी या सड़क हादसों का इलाज यहाँ सम्भव नहीँ है। दोनों अस्पताल सिर्फ रेफरल यूनिट हैं। सड़क हादसों पीडितों के पहुँचने के पहले यहाँ रेफर पर्ची तैयार रहती है। घायल व्यक्ति के पहुँचते ही मरहमपट्टी के बाद उसे वारणसी के लिए भेज दिया जाता है। काफी लोग बीएचयू ट्रामा सेंटर पहुँचने के पूर्व दमतोड़ देते हैं। अब यहाँ एकांतवास भी बनाया गया है।

दो निजी अस्पतालों के वेंटीलेटर पर निर्भर 20 लाख लोगों का स्वास्थ्य

भदोही जिले की अनुमानित आबादी करीब 20 लाख तक पहुँच गई है। लेकिन ज्ञानपुर और भदोही स्थित दोनों बड़े अस्पतालों में एक भी वेंटीलेटर की सुविधा नहीँ है। फ़िर कोरोना जैसे संक्रमण बीमारी की लड़ाई कैसे लड़ी जाएगी। 15 साल पूर्व जिला अस्पताल की आधारशिला बसपा सरकार में तत्कालीन मंत्री रंगनाथ मिश्र ने रखा था , लेकिन आज तक अस्पताल नहीँ बन पाया। प्रवासी मजदूरों और परदेशियों के आगमन के बाद कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। अब तक 12 से अधिक मरीज हो गए हैं। जिले में पॉजिटिव मरीजों को रखने की कोई सुविधा नहीँ है। उन्हें मण्डलीय अस्पताल मिर्जापुर भेजा जा रहा है। स्वास्थय सुविधा का हाल यह है कि कालीन मार्ट को एकांतवास केंद्र बनाने का निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया है। मंडलायुक्त प्रीति शुक्ला निरीक्षण भी कर चुकी हैं।

भदोही की मुख्य चिकित्साधिकारी डा. लक्ष्मी सिंह ने बताया कि सरकारी अस्पताल में वेंटीलेटर की कोई सुविधा नहीँ है। पूरे जिले में सिर्फ दो वेंटीलेटर हैं वह भी निजी अस्पतालों में। एक भदोही दूसरा औराई के निजी अस्पताल में वेंटीलेटर उपलब्ध है। अगर इस तरह की कोई स्थिति आती है तो वहीं दो विकल्प हैं। लेकिन मरीजों के बढ़ने पर क्या हालत होंगे ? इस पर डा.सिंह का कहना था कि हमारी पूरी तैयारी है हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। लेकिन भगवान से मनाइए कि इस तरह का मौका न आए। फ़िर सोचिए हम कहाँ खड़े हैं।

विज्ञापन
Loading...

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article

कर्ज देने को लेकर बैंकों को फिच की चेतावनी, दो साल में 6% तक बढ़ जाएगा एनपीए

फिच रेटिंग्स ने गुरुवार (28 मई) को एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी कि सरकार के करीब 20 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज...

कोरोना लॉकडाउन के कारण पाकिस्तान में फंसे 300 भारतीय शनिवार को स्वदेश लौटेंगे

भारत ने पाकिस्तान में कोरोना वायरस महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में फंसे अपने तीन सौ नागरिकों को वापस स्वदेश लौटने की अनुमति दे...