
मुंबई: लीलावती किर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (LILAVATI Trust Scam Mumbai) के वर्तमान ट्रस्टियों ने पूर्व ट्रस्टियों पर 1200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप लगाया है। ट्रस्ट ने इस मामले में अब तक तीन एफआईआर दर्ज कराई हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से आग्रह किया है कि इस घोटाले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की जाए। ट्रस्ट का कहना है कि यह धनराशि गंभीर वित्तीय अपराधों की उपज है, जिसका इस्तेमाल अवैध रूप से किया गया है।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
बांद्रा मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देश पर बांद्रा पुलिस ने 6 मार्च को 14 पूर्व ट्रस्टियों और तीन निजी कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में एफआईआर दर्ज की है। मौजूदा ट्रस्टियों का आरोप है कि अस्पताल के लिए सामान आपूर्ति करने वाले तीसरे पक्ष के डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ अवैध लेनदेन के माध्यम से यह हेराफेरी की गई।
20 साल से चल रहा था घोटाला
ट्रस्टियों के अनुसार, यह वित्तीय अनियमितता पिछले 20 वर्षों से जारी थी। 2002 के बाद, जब ट्रस्ट के प्रमुख किशोर मेहता की तबीयत बिगड़ी, तो उनके कुछ रिश्तेदारों ने अस्पताल पर अवैध कब्जा कर लिया। इसके बाद अस्पताल के फंड का गलत इस्तेमाल किया गया और गैर-कानूनी तरीकों से पैसा बाहर भेजा गया। ट्रस्ट की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि पूर्व ट्रस्टियों ने अस्पताल के फंड का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है।
काला जादू और तांत्रिक गतिविधियों के भी आरोप
ट्रस्टियों ने यह भी चौंकाने वाला दावा किया है कि अस्पताल परिसर में काला जादू और तांत्रिक गतिविधियां की गईं। पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने कहा कि जांच के दौरान अस्पताल में मानव खोपड़ियां और तांत्रिक सामग्री बरामद हुई हैं। ट्रस्ट का दावा है कि पूर्व ट्रस्टियों और उनके सहयोगियों ने अनैतिक गतिविधियों का सहारा लिया, जिससे ट्रस्ट की साख को नुकसान पहुंचा।
ED और EOW से जांच की मांग
ट्रस्ट के स्थायी ट्रस्टी प्रशांत मेहता (53) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिखकर इस मामले की गहराई से जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट से साफ हो गया है कि 1200 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी हुई है। ट्रस्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है।
पुलिस कार्रवाई और आगे की जांच
अब तक बांद्रा पुलिस स्टेशन में तीन से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि एक और शिकायत अदालत में लंबित है। ट्रस्ट का कहना है कि वे अस्पताल की गरिमा और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई जारी रखेंगे और दोषियों को सजा दिलाने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।
निष्कर्ष
लीलावती अस्पताल में हुआ यह घोटाला मेडिकल सेक्टर के सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जा रहा है। पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। यदि दोषियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो PMLA के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
(यह मामला अभी भी जांच के अधीन है, और पुलिस की रिपोर्ट के बाद नए खुलासे होने की संभावना है।)
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