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मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अनिल देशमुख के साथ उनके बेटे और करीबियों पर केस दर्ज, ईडी के हाथ कुछ अहम जानकारियां लगी

मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अनिल देशमुख और उनके सहयोगियों पर केस दर्ज कर जांच करने वाली ईडी के हाथ कुछ और अहम जानकारियां लगी हैं. जिसके बाद अनिल देशमुख के बेटे ऋषिकेश देशमुख और उनके करीबियों पर जांच की तलवार लटक रही है. जांच में सामने आया है कि देशमुख परिवार की निगरानी में कई कंपनियां और ट्रस्ट चलाए जा रहे हैं.

ईडी को ऐसी 11 कंपनियों के बारे में पता चला है जो की अनिल देशमुख के परिवार के सीधे कंट्रोल में है. साथ ही 13 ऐसी कंपनियां हैं जो अनिल देशमुख के परिवार से जुड़े लोगों के द्वारा चलाई जाती हैं लेकिन इनडायरेक्टली अनिल देशमुख का परिवार उस पर कंट्रोल करता है. ईडी की जांच में ये बात सामने आई है कि इन कंपनियों के बीच में लगातार ट्रांजैक्शंस हुए हैं. ईडी ने 25 जून को मुंबई, नागपुर और अहमदाबाद के 6 ठिकानों पर रेड की और 6 डायरेक्टर्स और 2 CA का स्टेटमेंट दर्ज किया.

दूसरों के नाम पर चला रहे थे कई कंपनियां

इन सभी से पूछताछ के बाद जो जानकारी मिली उसके मुताबिक इन्हीं लोगों के जरिए देशमुख परिवार अलग-अलग नामों की कंपनियां चला रहा था और इन कंपनियों का सीधा कंट्रोल इनके जरिए देशमुख परिवार के हाथ में था. विक्रम शर्मा नाम के डमी डायरेक्टर से जब ईडी ने पूछताछ की तो इस डायरेक्टर ने अनिल देशमुख के बेटे ऋषिकेश देशमुख का नाम लिया और बताया कि उसकी कंपनी “Qubix हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड” को स्थापित करने के लिए ऋषिकेश देशमुख ने पैसे दिए थे. विक्रम शर्मा ने बताया ऐसी ही कई और कंपनियां भी हैं.

रेस्टोरेंट से वसूली कर वाजे ने देशमुख के PA को दिया

अनिल देशमुख के सीए प्रकाश रमानी ने भी ईडी के सामने यह बताया है कि जिन कंपनियों की जानकारी ईडी के पास आई है ये सभी कंपनियां प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष रूप से देशमुख परिवार के कंट्रोल में है. 100 करोड रुपए वसूली के मामले में ईडी ने सचिन वाज़े का स्टेटमेंट भी दर्ज किया है. साथ ही कुछ बार और रेस्टोरेंट मालिकों का भी बयान दर्ज किया है जिसमें यह बातें सामने आई है कि मुंबई के जोन 1 से लेकर जोन 12 तक के सभी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले बार और रेस्टोरेंट से करीब 4 करोड़ 70 लाख वसूल करके दिसंबर से फरवरी महीने के बीच सचिन वाज़े ने अनिल देशमुख के पीए कुंदन शिंदे को दिया था. कुंदन को ईडी ने फिलहाल गिरफ्तार किया है.

नागपुर के ट्रस्ट में फर्जी कंपनियों ने दिए पैसे

ईडी की जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है. नागपुर स्थित श्री साई शिक्षण संस्था जिसके चेयरमैन अनिल देशमुख हैं साथ ही उनके परिवार के कई लोग इस संस्था के ट्रस्टी हैं. यहां तक कि गिरफ्तार किया गया कुंदन भी संस्था का मेंबर है. जांच में पता चला कि पिछले कुछ समय से इस संस्था को 4 करोड़ 18 लाख रुपए मिले हैं. इस संस्था के बैंक एकाउंट की एंट्री को देखने के बाद ईडी ने इस संस्था को पैसे देने वाली कंपनियों की तलाश की तो पता चला ये कंपनियां दिल्ली में है लेकिन सिर्फ पेपर पर. याने की यह कंपनियां सिर्फ कैश ट्रांजैक्शन को सेटल करने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी जिसे सेल कंपनियां कहते हैं.

ऋषिकेश देशमुख की निगरानी में हुआ सब

ईडी ने जांच के दौरान इन सेल कंपनियों के मालिक सुरेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन से पूछताछ की गई. जांच में पता चला की नागपुर से एक शख्स द्वारा इन्हें कांटेक्ट किया गया और श्री साईं शिक्षण संस्था को कैश के ऐवज में डोनेशन दिए जाने की बात कही. ये कैश हवाला के जरिए नागपुर से दिल्ली भेजा गया और फिर इन सेल कंपनियों के माध्यम से डोनेशन के रूप में 4 करोड़ 18 लाख रुपए श्री साईं शिक्षण संस्था को मिला। ईडी के मुताबिक यह सब कुछ अनिल देशमुख के बेटे ऋषिकेश देशमुख की निगरानी में हो रहा था.

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