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Sunday, April 11, 2021

उमर अब्दुल्ला के हिरासत मामले पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, 2 मार्च तक जवाब मांगा

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सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति इंद्रा बनर्जी की पीठ ने आज सुनवाई की। उमर अब्दुल्ला मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की सुनवाई 2 मार्च को होगी। बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला पायलट ने याचिका डाल हिरासत में लिए गए अपने भाई उमर अब्दुल्ला की रिहाई की मांग की है। 

याचिका शुक्रवार को सुनवाई के लिए लिए दो न्यायाधीशों की नयी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई थी। इस नयी पीठ में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी भी हैं। न्यायमूर्ति एम एम शांतनगौडर बुधवार को बिना कोई कारण बताए मामले में सुनवाई से अलग हो गए थे। इससे पहले सारा पायलट की याचिका न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना, न्यायमूर्ति एम एम शांतनगौडर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय पीठ के सामने सुनवाई के लिए आयी थी।

यह भी पढ़ें- उमर अब्दुल्ला की रिहाई की याचिका पर न्यायमूर्ति शांतानागौडर ने खुद को किया अलग

पायलट ने 10 फरवरी को शीर्ष अदालत का रूख कर जम्मू कश्मीर जन सुरक्षा कानून 1978 के तहत अपने भाई की हिरासत को ‘अवैध’ बताया और कहा कि शांति व्यवस्था बहाल रखने को लेकर उनसे किसी खतरे का सवाल ही नहीं उठता। याचिका में पीएसए के तहत पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हिरासत में रखने के पांच फरवरी के आदेश को खारिज करने और उन्हें अदालत के समक्ष हाजिर करने की मांग की गयी। 

दरअसल, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के खिलाफ जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामले दर्ज किए जाने के लिए नेकां नेता की पार्टी की आंतरिक बैठकों की कार्यवाहियों और सोशल मीडिया पर उनके प्रभाव तथा पीडीपी प्रमुख के ‘अलगाववादी’ समर्थक रुख का अधिकारियों ने जिक्र किया है। 

उमर अब्दुल्ला (49) और महबूबा मुफ्ती (60) को पिछले साल पांच अगस्त से एहतियातन हिरासत में रखा गया है, जब केंद्र ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने और इस पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों- लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर- में बांटने की घोषणा की थी।

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