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सियासी दांवः जिलाध्यक्ष पर भारी पड़े भाजपा विधायक, हाईकमान ने अपने प्रत्याशी से वापस लिया समर्थन

भदोही। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन वापसी होने तक सियासी खेल चलता रहा। भारतीय जनता पार्टी ने जनपद में अपने घोषित प्रत्याशी से समर्थन वापस ले लिया है। जबकि भाजपा से बगावत करने वाले दो प्रत्याशियों में से एक ने अपना नामांकन वापस लिया है। अब अध्यक्ष पद के लिए केवल दो प्रत्याशी मैदान में हैं।

जनपद में इस सियासी खेल को लेकर तमाम तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि दिन के वक्त तक उम्मीद जताई जा रही थी कि यह सीट निर्विरोध हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जनपद में भाजपा प्रत्याशी सहित तीन लोगों ने नामांकन किया था। इसमें भाजपा के युवा प्रत्याशी अमित सिंह के अलावा भाजपा विधायक के भतीजे चंद्रप्रकाश त्रिपाठी और भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी का नाम शामिल है। जबकि समाजवादी पार्टी की घोषित प्रत्याशी श्याम कुमारी मौर्य का नामांकन तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया था। पार्टी हाईकमान द्वारा समर्थन वापसी के सवाल पर भाजपा जिलाध्यक्ष विनय श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर अमित सिंह को पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया था। अब उसी के निर्देश पर अमित सिंह से समर्थन वापस लिया जा रहा है। कहा कि भाजपा फिलहाल किसी को यहां समर्थन नहीं दे रही है। अमित सिंह ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया है। ऐसे में स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में अब वह मैदान में हैं। भाजपा विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी के भाई को समर्थन के सवाल पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें भी समर्थन नहीं दिया जा रहा है। दोनों प्रत्याशी अब स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। गौरतलब है कि भदोही के भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी अपने भाई के नामांकन में स्वयं कलेक्ट्रेट आए थे। उसी के बाद यहां के बदलते राजनैतिक परिदृश्य को लेकर खासीे चर्चा थी। विधायक के भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी भले ही निर्दल उम्मीदवार के रूप में अब जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन पार्टी व संगठन के कद्दावर नेता का साथ ही पूरी कहानी को समझने के लिए काफी है।

बागी और निर्दल के बीच होगा मुकाबला

जनपद में आज हुई नाम वापसी में भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी के भतीजे चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने अपना पर्चा वापस ले लिया। ऐसे में अब जनपद में दो प्रत्याशी शेष रह गए हैं। इसमें एक युवा प्रत्याशी अमित सिंह हैं, जबकि अमित सिंह के मुकाबले में भाजपा विधायक के भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी मैदान में हैं। हालांकि चुनावी पंडितों की मानें तो अब पलड़ा भाजपा के बागी प्रत्याशी अनिरुद्ध त्रिपाठी के पक्ष में ज्यादा है, क्योंकि भाजपा ने अपने प्रत्याशी अमित सिंह से अपना समर्थन वापस ले लिया है। अब लोगों की निगाहें मतदान पर टिकी हुई हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष की भूमिका भी संदेहास्पद

हमेशा विवादित बयान देकर चर्चा में रहने वाले जनपद के भाजपा जिलाध्यक्ष विनय श्रीवास्तव की भूमिका इस चुनाव में खासी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। हालांकि इस मुद्दे पर न तो जिलाध्यक्ष कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पार्टी हाईकमान की मंशा थी कि यह सीट भी निर्विरोध हो जाए, क्योंकि विपक्ष में भाजपा के ही बागी प्रत्याशी थे। इसके लिए आज सुबह ही भाजपा प्रत्याशी से समर्थन वापसी की सूचना दे गई, पर जिलाध्यक्ष ने पर्याप्त समय होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी की पर्चा वापसी नहीं करवाई।

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