Global Statistics

All countries
195,050,854
Confirmed
Updated on July 26, 2021 4:06 pm
All countries
175,209,494
Recovered
Updated on July 26, 2021 4:06 pm
All countries
4,179,019
Deaths
Updated on July 26, 2021 4:06 pm

Global Statistics

All countries
195,050,854
Confirmed
Updated on July 26, 2021 4:06 pm
All countries
175,209,494
Recovered
Updated on July 26, 2021 4:06 pm
All countries
4,179,019
Deaths
Updated on July 26, 2021 4:06 pm

घूमा समय का पहिया और पंचर हो गई साइकिल!

भदोही। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में समयचक्र का ऐसा पहिया घूमा कि अजेय समझी जाने वाली समाजवादी पार्टी को यहां से बेदखल होना पड़ा। हालांकि, समाजवादी पार्टी नामांकन के दिन से ही यहां फाइट से बाहर हो गई थी। पर, अंत समय तक चले उठापटक में कयासबाजी का दौर जारी रहा।

नाम वापसी के दिन हुए घटनाक्रम (भाजपा द्वारा समर्थन वापस लेना) ने इस लड़ाई के और भी रोचक बना दिया। इसके बाद राजनैतिक पंडितों की भी निकल पड़ी और दो निर्दलियों के बीच किसी ‘तीसरे’ के आगमन की चर्चा छिड़ गई, पर चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद यहां का राजनैतिक परिदृश्य पूरी तरह से साफ हो गया।

भदोही जनपद सृजन के बाद से किसी न किसी बहाने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर समाजवादी पार्टी का ही कब्जा रहा है। अब 2021 में पहली बार किसी निर्दलीय का कब्जा हुआ है। सूबे की सत्ताधारी पार्टी से बगावत कर चुनाव लडने वाले अनिरुद्ध त्रिपाठी ने सभी पार्टियों को चारो खाने चित्त कर दिया है। नामांकन से लेकर मतदान समाप्त होने तक भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी के भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी के बगावती तेवर देखने को मिले।

गौरतलब हैकि जनपद सृजन के बाद से पहली बार जिला पंचायत की कुर्सी पर सपा के बैनर तले शिवकरन यादव ने 1995 में कब्जा जमाया। इसके बाद समाजवादी पार्टी से विजय मिश्र ने 2000 में कुर्सी हथियाई। विजय मिश्र के बाद उनकी पत्नी रामलली मिश्र ने वर्ष 2002 (उपचुनाव) चुनाव जीता और यह सीट फिर से सपा के पाले में चली गई। इसके बाद एक बार फिर 2005 में रामलली मिश्रा ने सपा केबैनर तले इस कुर्सी पर कब्जा जमाया। हालांकि लंबे उठापटक के बाद सपा को पटकनी देकर बसपा की श्यामला सरोज 2010 में यह कुर्सी बीएसपी की झोली में डाली, पर बीएसपी पांच साल तक नहीं चल पाई और बीच में ही अध्यक्षी की कुर्सी सपा की रीना सोनकर (वर्ष 2013) के पास चली गई और फिर से समाजवादी पार्टी का कब्जा हो गया। कुछ इसी तरह की घटना 2015 में फिर सपा ने दोहराई, जिसमें सपा प्रत्याशी काजल यादव सपाध्निषाद पार्टी से जीत हासिल की। पर, 2021 के चुनाव में समाजवादी पार्टी का कोई तिकड़म काम नहीं आया।

हालात यहां तक पहुंच गए कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का पर्चा ही दाखिला नहीं हो सका। जबकि अंत समय तक पार्टी से बगावत करने वाले अनिरुद्ध त्रिपाठी मैदान में डटे रहे। नाम वापसी के पहले तक यहां के चुनाव में भाजपा का चेहरा भी सामने रहा, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ऐन वक्त पर अपना समर्थन वापस ले लिया, जिससे दो निर्दल प्रत्याशी आमने सामने हो गए और, जीत भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी के भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी की हुई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles