मुंबई की एक विशेष अदालत ने अमरावती के चर्चित उमेश कोल्हे हत्याकांड को लेकर बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस हत्या को आतंकी कृत्य करार देते हुए आरोपी की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला राज्य में कानून व्यवस्था और ऐसे मामलों में सख्त रुख को दर्शाता है।
विशेष न्यायाधीश चकोर बाविस्कर ने आरोपी इरफान खान की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह हत्या किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम नहीं थी, बल्कि समाज में डर और दहशत फैलाने के उद्देश्य से रची गई एक सुनियोजित साजिश थी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस घटना के सभी पहलू गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 15 के तहत आतंकी कृत्य की परिभाषा में आते हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी द्वारा हमलावरों को आर्थिक और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की गई थी, जिससे यह साबित होता है कि वह इस साजिश में सक्रिय रूप से शामिल था। इसके अलावा, गवाहों के बयान के आधार पर यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे, जिससे माहौल को और तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की गई।
आरोपी के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि उनका NGO ‘रहेबर हेल्पलाइन’ किसी भी तरह का आतंकी संगठन नहीं है और इस मामले में UAPA लागू नहीं होना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कानून लागू होना पूरी तरह उचित है।
इस मामले में एक अन्य आरोपी शाहरुख खान की जमानत याचिका भी अदालत ने खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि शाहरुख खान घटना से पहले की रेकी में शामिल था और उसे पूरी साजिश की जानकारी थी, जिससे उसकी भूमिका भी संदिग्ध और गंभीर मानी गई।
गौरतलब है कि 21 जून 2022 को अमरावती में मेडिकल स्टोर चलाने वाले उमेश कोल्हे की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र में सनसनी फैला दी थी और इसके बाद जांच एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
मुंबई कोर्ट के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि यदि किसी अपराध का उद्देश्य समाज में भय और आतंक फैलाना है, तो उसे सख्ती से आतंकवाद की श्रेणी में रखा जाएगा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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