वसई में रेलवे यार्ड प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे मिट्टी भराव को लेकर स्थानीय नागरिकों में चिंता का माहौल है। आशंका जताई जा रही है कि इस काम के कारण प्राकृतिक नाले और पानी के निकासी मार्ग बंद हो रहे हैं, जिससे आने वाले मानसून में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
पूर्व महापौर नारायण मानकर ने प्रशासन से इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने और उचित उपाय करने की मांग की है। उनका कहना है कि नायगांव–वसई क्षेत्र में चल रहे इस कार्य से उमेला, उमेलमान, बरामपुर और नवघर–माणिकपुर जैसे इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या हो सकती है।
वहीं, वेस्टर्न रेलवे के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर आनंद कुलकर्णी ने बताया कि इस नए यार्ड में लगभग 30 EMU रेक्स को रात में खड़ा करने और उनकी मेंटेनेंस की सुविधा होगी। यह प्रोजेक्ट 2027 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि पांचवीं और छठी रेलवे लाइन का कार्य 2028 तक पूरा किया जाएगा।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मानसून से पहले पानी निकासी के लिए पाइपलाइन जैसी अस्थायी व्यवस्थाएं 15 मई तक पूरी कर ली जाएंगी। साथ ही, जहां-जहां नाले मिट्टी से बंद हुए हैं, उन्हें साफ कर फिर से चालू किया जाएगा।
रेलवे प्रशासन ने यह भी बताया कि आवश्यक स्थानों पर करीब 1 मीटर चौड़ाई के बॉक्स कल्वर्ट बनाए जाएंगे, जिससे बारिश का पानी आसानी से बह सके और जलभराव की समस्या न हो।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन अपने वादों को समय पर पूरा करेगा और उन्हें मानसून में संभावित जलभराव से राहत मिलेगी।
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