विरार | मेट्रो सिटी समाचार: वसई-विरार महानगरपालिका (VVMC) की महासभा में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने निलंबित अधिकारियों की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे “सिर्फ दिखावा” करार दिया।
⚠️ “जांच का क्या हुआ नतीजा?”
मनोज पाटिल ने आरोप लगाया कि पिछले 10-12 वर्षों में कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए, कुछ को एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथ पकड़ा, जबकि कई अधिकारी आज भी कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं या जेल में हैं।
👉 इसके बावजूद:
- जांच का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया
- न ही जनता और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई
🚨 निलंबित अधिकारियों की दोबारा नियुक्ति पर सवाल
पाटिल ने बताया कि:
- 10 से अधिक प्रभारी सहायक आयुक्तों को फिर से सेवा में लिया गया
- जिन कारणों से निलंबन हुआ, उसी पद पर फिर नियुक्ति
उन्होंने इसे प्रशासन के “अपने ही आदेशों की अवहेलना” बताया।
💰 भ्रष्टाचार पर सख्त टिप्पणी
👉 लाचखोरी में जेल जा चुके अधिकारियों को भी वापस महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया गया
👉 इससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलने का आरोप
पाटिल ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद संदिग्ध है और पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।
🏛️ 15 दिन में रिपोर्ट देने की मांग
विपक्ष नेता ने मांग की कि:
- पिछले 10 साल की सभी विभागीय जांच रिपोर्ट पेश की जाए
- दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई, इसका पूरा ब्योरा दिया जाए
👨⚖️ महापौर का जवाब
महापौर ने कहा कि:
👉 जांच के दौरान अधिकारियों को घर बैठाकर वेतन देने के बजाय काम लिया जाए
👉 लेकिन दोष साबित होने पर सख्त कार्रवाई हो
⚡ जनता में नाराजगी
इस पूरे मामले को लेकर वसई-विरार क्षेत्र में लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
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