वसई-विरार शहर महानगरपालिका के बोळिंज स्थित 30 एमएलडी क्षमता वाले मलनिस्सारण (सीवेज ट्रीटमेंट) प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है।
करीब 385 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट की हालत महज 9 साल में ही खराब हो गई है।
🚨 महासभा में उठा भ्रष्टाचार का मुद्दा
महानगरपालिका की महासभा में विरोधी पक्षनेता मनोज पाटील ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए प्रशासन और सत्ताधारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के बीम और पिलर तक गिरने की स्थिति में हैं, जबकि ऐसा RCC स्ट्रक्चर कम से कम 50 साल तक टिकना चाहिए था।
⚠️ स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बड़ा खतरा
👉 प्रोजेक्ट की क्षमता: 30 MLD
👉 वर्तमान प्रोसेसिंग: सिर्फ 8 MLD
बाकी का सारा गंदा पानी सीधे खाड़ी में छोड़ा जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 25 दिनों से प्रोजेक्ट पूरी तरह बंद है और बिना ट्रीटमेंट का सांडपानी समुद्र में जा रहा है।
🧪 प्रदूषण के नियमों की खुली धज्जियां
जहां रोजाना 2 टन गाद निकलनी चाहिए, वहां केवल 5 किलो गाद निकल रही है।
इससे साफ है कि प्रोजेक्ट में भारी तकनीकी गड़बड़ी और लापरवाही हो रही है।
💰 जनता पर पड़ रहा जुर्माने का बोझ
प्रशासन की लापरवाही के कारण NGT और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगाए गए जुर्माने का भार आम जनता पर पड़ रहा है।
🏗️ घटिया सामग्री का आरोप
मनोज पाटील ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट में स्टेनलेस स्टील की जगह माइल्ड स्टील का उपयोग किया गया, जिससे पूरी संरचना सड़ गई।
📢 श्वेतपत्रिका और FIR की मांग
उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जांच, श्वेतपत्रिका जारी करने और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
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