विरार: वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) की 20 मार्च को हुई महासभा में नालेसफाई को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। विरोधी पक्षनेता मनोज पाटील ने प्रशासन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
उन्होंने बताया कि नालेसफाई के लिए प्रस्तावित 18 करोड़ रुपये के खर्च का कोई स्पष्ट प्लान प्रशासन के पास नहीं है। सबसे बड़ा आरोप यह है कि पालिका ने एक मशीन, जिसकी बाजार कीमत करीब 36 लाख रुपये है, उसे मात्र 38 दिनों के लिए 38 लाख रुपये किराए पर लिया।
पाटील ने इसे सीधे तौर पर जनता के पैसों की लूट बताते हुए कहा कि खरीद कीमत से ज्यादा किराया देना गंभीर अनियमितता है।
उन्होंने यह भी बताया कि नालेसफाई का माप कितना गाद निकला इस आधार पर नहीं बल्कि मशीन कितने घंटे चली इस आधार पर किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत प्रणाली है।
साथ ही, तुंगारेश्वर से आने वाले पानी के लिए 900 मीटर नाला पिछले 3 साल से अधूरा पड़ा है, जिससे बारिश में बाढ़ जैसी स्थिति बनती है।
ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए पाटील ने कहा कि पहले भी लोकल फंड ऑडिट और CAG ने इस काम पर सवाल उठाए थे, लेकिन प्रशासन ने सुधार नहीं किया।
इस मुद्दे पर महासभा में जमकर हंगामा हुआ और अब इस मामले ने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है।
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