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Wednesday, October 21, 2020

31 अक्टूबर से शुरू हो रही है संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक

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31 अक्टूबर से शुरू हो रही है संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक में संगठन की गुणात्मकता बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी. यह बैठक 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक ठाणे स्थित केशवसृष्टि में आयोजित की जाएगी.

अरुण कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष में दो बार इस प्रकार की बैठकों का आयोजन करता है. मार्च में होने वाली प्रतिनिधि सभा बैठक में करीब 1400 सदस्य हिस्सा लेते हैं. जबकि दशहरे से दीवाली के बीच होने वाली बैठक में करीब 350 सदस्य उपस्थित रहते हैं.

मौजूद रहेंगे मोहन भागवत और भैयाजी जोशी

बुधवार से शुरू हो रही इस बैठक में संघ के 11 क्षेत्रों और 43 प्रांतों के संघचालक, कार्यवाहक और प्रचारकों सहित सात आनुषंगिक संगठनों के संगठन सचिव हिस्सा लेंगे. बुधवार को सुबह 8:30 बजे केशवसृष्टि प्रांगण स्थित रामरतन विद्यामंदिर के बालासाहब देवरस सभागार में यह बैठक शुरू होगी. जिसमें पूरे समय संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाहक भैयाजी जोशी उपस्थित रहेंगे.

इस बैठक के दौरान प्रतिनिधि सभा बैठक में बनाई गई योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ देश की वर्तमान परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में समसामयिक विषयों पर भी चर्चा होगी. इस बैठक में संगठन की गुणात्मकता बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी. अरुण कुमार ने बताया कि कार्यकारी मंडल बैठक में इस विषय पर भी विचार होगा कि देश के विचारवान लोगों तक अपनी पहुंच कैसे बढ़ाई जाए और संघ के आंतरिक संगठन को किस प्रकार मजबूत किया जाए. लेकिन कोई नया प्रस्ताव इस बैठक में नहीं लाया जाएगा.

जरूरत पड़े तो सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए कानून

इस दौरान राम जन्मभूमि के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अरुण कुमार ने कहा कि हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में यह स्वीकार किया था कि उपरोक्त स्थान रामलला का जन्म स्थान है. तथ्य और प्राप्त साक्ष्यों से भी यह सिद्ध हो चुका है कि मंदिर तोड़कर ही वहां कोई ढांचा बनाने का प्रयास किया गया और पूर्व में वहां मंदिर ही था.

संघ का मत है कि जन्मभूमि पर भव्य मंदिर शीघ्र बनना चाहिए और जन्म स्थान पर मंदिर निर्माण के लिए भूमि मिलनी चाहिए. मंदिर बनने से देश में सद्भावना व एकात्मता का वातावरण निर्माण होगा. इस दृष्टि से सुप्रीम कोर्ट शीघ्र निर्णय करे, और अगर कुछ कठिनाई हो तो सरकार कानून बनाकर मंदिर निर्माण के मार्ग की सभी बाधाओं को दूर कर श्रीराम जन्मभूमि न्यास को भूमि सौंपे.

उन्होंने कहा कि जब से यह आंदोलन शुरू हुआ है पूज्य संतों और धर्म संसद के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा है, और उसका हमनें समर्थन किया है. आगे भी वे जो निर्णय करेंगे उसमें हम उनका समर्थन करेंगे.

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