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महाभारत में एक शख्स की सब इज्जत करते थे, वह हैं महात्मा विदुर। कौरव हों या पांडव या फिर भगवान कृष्ण हर कोई उनका सम्मान करते थे। विदुरजी अपने ज्ञान और अनुभव के कारण ही महाभारत के महा युद्ध से अलग रह पाए और बाद में पांडवों के जीत जाने पर युधिष्ठिर के भी महामंत्री हुए। विदुरजी धर्मराज का अंशावतार माने जाते हैं, जिनको नीतियों का महाज्ञान था। उनकी नीतियां मानव जीवन के लिए बहुत कल्याणकारी थीं। उनकी नीतियां पहले भी कारगर रही थीं और अब भी बेहद प्रासंगिक हैं। उन्होंने अपने एक श्लोक के माध्यम से कहा है कि जिनके पास ये 6 चीजें होती हैं, वह सबसे सुखी इंसान हैं। आइए जानते हैं विदुरजी ने अपने श्लोक में किन चीजों के बारे में जिक्र किया है…

1/6यह है मनुष्य का सबसे बड़ा धन

आरोग्यमानृण्यमविप्रवासः सद्भिर्मनुष्यैस्सह संप्रयोगः।
स्वप्रत्यया वृत्तिरभीतवासः षट् जीवलोकस्य सुखानि राजन्।।
विदुरजी ने अपने श्लोक के माध्यम से कहा है कि जो व्यक्ति हमेशा स्वस्थ्य रहता है, वह सबसे सुखी है। आज के दौर में अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन और सुख है। अगर कोई हमेशा स्वस्थ्य रहता है तो वह कार्य अच्छी तरह से पूरा करता है। अगर कोई व्यक्ति निरोगी है तो वह कई तरह के सुखों से वंचित रह जाता है।

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2/6ऐसे लोग नहीं होते सुखी

श्लोक में आगे बताया है कि जिस व्यक्ति के पास कोई कर्ज नहीं होता है, वह भी आज के दौर में सबसे सुखी है। हर कोई भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए मेहनत करता है लेकिन वह मुकाम हासिल नहीं कर पाता है, जिसके लिए वह कर्ज लेता है।

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3/6ऐसे धन का कोई फायदा नहीं

जो व्यक्ति अपने माता-पिता और परिवार के साथ रहता है, वह भी सुखी इंसान है। धन कमाने के लिए लोग अपने परिवार को छोड़कर परदेस में चले जाते हैं। वह धन तो प्राप्त कर लेते हैं लेकिन परिवार से दूर हो जाते हैं। इसलिए जो व्यक्ति आज के दौर में अपने परिवार के साथ रहता है, वह व्यक्ति बहुत सुखी माना जाता है।

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4/6नहीं होती कोई समस्या

विदुर कहते हैं कि जिस व्यक्ति के पास अच्छे दोस्त होते हैं, जो सबसे अच्छे से बातचीत करता है। अच्छे व्यक्तियों के साथ उसका मेलजोल है तो वह व्यक्ति सबसे सुखी है। अगर वह किसी समस्या में फंसता भी है तो उसकी मदद करने वाले कई लोग होते हैं।

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5/6ऐसे इंसान सबसे सुखी

आज के दौरान जो व्यक्ति के खुद का व्यवसाय करके अपनी आजीविका चलाता है, वह सबसे सुखी है। आप कितनी भी अच्छी नौकरी क्यों ना कर रहे हों, फिर भी आपके अंदर एक भय रहता है। दूसरों के यहां नौकरी करने से अच्छा है कि आप लोगों को अपने यहां नौकरी पर रखें।

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6/6नहीं रहता हो इनका भय

श्लोक के अंत में विदुरजी ने कहा है कि जो व्यक्ति भययुक्त अपना जीवन यापन करता है, वह सबसे सुखी इंसान है। वर्तमान दौर में मनुष्य एक डर के माहौल में रहता है, चाहें फिर वो परिवार का हो, धन का हो या फिर अपने शत्रुओं का या फिर जिंदगी में आगे बढ़ने का आदि इन सब बातों का भय कहीं ना कहीं रहता है। जिसे इन चीजों का भय नहीं रहता है, वह सबसे सुखी है।

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