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विरार की जीवदानी माता मंदिर में बनेगा 1500 फीट ऊंचा ग्लास स्काईवॉक, रोमांच और आस्था का अनोखा संगम

जीवदानी मंदिर विरार में ग्लास स्काईवॉक का दृश्य
जीवदानी माता मंदिर में बन रहा 1500 फीट ऊंचा ग्लास स्काईवॉक- AI Generated Pic.

विरार: शहर की पहचान बन चुके जीवदानी माता मंदिर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहद खास और आधुनिक आकर्षण तैयार हो रहा है। मंदिर परिसर में करीब 1500 फीट की ऊंचाई पर ग्लास स्काईवॉक (कांच की गैलरी) का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिसका उद्घाटन जल्द ही किया जाएगा।

यह स्काईवॉक पूरी तरह से हाई-स्ट्रेंथ 39mm टेम्पर्ड ग्लास से तैयार किया गया है, जो सुरक्षा के लिहाज से अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता है। खास बात यह है कि इस पारदर्शी गैलरी पर खड़े होकर श्रद्धालु और पर्यटक एक साथ साफला से लेकर उत्तन और विरार-अर्नाला बेल्ट तक का विहंगम नजारा देख सकेंगे।

इस स्काईवॉक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां चलने वाले लोगों को हवा में चलने जैसा अनुभव होगा। खासकर सूर्यास्त के समय यह दृश्य बेहद आकर्षक और यादगार बनने वाला है, जब पूरा इलाका सुनहरी रोशनी में नहाया नजर आएगा।

🏗️ 84 लाख की लागत, 200 लोगों की क्षमता

करीब ₹84 लाख की लागत से तैयार इस परियोजना में एक समय में लगभग 200 लोगों के खड़े रहने की क्षमता रखी गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलिंग, मॉनिटरिंग सिस्टम और आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

🛕 पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

प्रशासन का मानना है कि इस नए आकर्षण से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। पहले से ही हजारों भक्तों की आस्था का केंद्र यह मंदिर अब धार्मिक पर्यटन के साथ एडवेंचर टूरिज्म का भी हॉटस्पॉट बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

📜 इतिहास और आधुनिकता का संगम

जीवदानी मंदिर का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। बताया जाता है कि 17वीं सदी में इस पहाड़ी पर जीवधन नामक किला हुआ करता था, जहां आज भी गुफाएं और जलकुंड मौजूद हैं। पहले श्रद्धालु करीब 1500 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर तक पहुंचते थे, लेकिन अब फनिक्युलर ट्रेन की सुविधा ने यात्रा को काफी आसान बना दिया है।


जीवदानी मंदिर में बन रहा यह ग्लास स्काईवॉक न केवल आस्था का नया आयाम जोड़ने वाला है, बल्कि विरार को पर्यटन के नक्शे पर एक नई पहचान भी देगा। आने वाले समय में यह स्थान मुंबई महानगर क्षेत्र का एक प्रमुख दर्शनीय और अनुभवात्मक स्थल बन सकता है।

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