‘राष्ट्र प्रथम’ के मंत्र के साथ भाजपा का विस्तार, पार्टी के 47वें वर्ष में प्रवेश पर बोले प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण
मुंबई : सोमवार को भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है। पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 में हुई थी। पार्टी ने 46 वर्ष पूर्ण कर 47वें वर्ष में पदार्पण किया है। भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने लेख लिखकर अपने विचार प्रकट किए हैं। चव्हाण ने कहा कि सामान्य कार्यकर्ता से पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनना यह सिर्फ बीजेपी जैसे संगठन में ही मुमकिन है।
उन्होंने अपने लेख में आगे लिखा है कि विचारधारा की गहरी जड़ों से मिट्टी में मजबूती से स्थापित और कार्यकर्ताओं के संघर्ष से खड़ा हुआ भारतीय जनता पार्टी का विशाल वटवृक्ष आज अपने 47वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 6 अप्रैल 1980 को बोया गया यह बीज आज लगभग 25 करोड़ से अधिक कार्यकर्ताओं के परिश्रम से पूरे देश में फैल चुका है।
भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता, भाजयुमो का उपाध्यक्ष, नगरसेवक, विधायक, कैबिनेट मंत्री और अब प्रदेशाध्यक्ष के रूप में जब मैं पार्टी के इतिहास की ओर देखता हूं, तो मुझे यह महसूस होता है कि जैसे विचारधारा ने एक-एक कार्यकर्ता को गढ़ा, उसी प्रकार असंख्य समर्पित कार्यकर्ताओं ने अपने खून-पसीने से गुरुदक्षिणा के रूप में पार्टी को खड़ा किया है। जब नेहरू-गांधी की अल्पसंख्यक केंद्रित समाजवादी विचारधारा और साम्यवादी आंदोलन का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव था, तब 75 वर्ष पहले जनसंघ के माध्यम से बहुसंख्यक लेकिन शोषित समाज को केंद्र में रखने और धारा के विपरीत तैरने का साहस डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने दिखाया। उनकी दूरदर्शिता आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक दीपस्तंभ है।
भाजपा के इस सफर में कई बड़े नेताओं का योगदान रहा
भाजपा के इस सफर में अनेक महान नेताओं का योगदान रहा है। महाराष्ट्र में 1980 में उत्तमराव पाटील ने पहले प्रदेशाध्यक्ष के रूप में संगठन की नींव रखी। इसके बाद गोपीनाथ मुंडे ने पार्टी को गांव-गांव तक पहुंचाया और बहुजन व ओबीसी समाज को मुख्यधारा में लाकर अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाया। 1995 में कांग्रेस की सत्ता को हटाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रा. ना. स. फरांदे ने पार्टी को वैचारिक आधार दिया, वहीं सूर्यभान वहाडणे पाटील ने अनुशासित नेतृत्व से संगठन को मजबूत किया। भाऊसाहेब फुंडकर ने किसानों के लिए संघर्ष करते हुए पार्टी को खेत-खलिहान तक पहुंचाया। नितिन गडकरी ने प्रमोद महाजन के निधन के बाद कार्यकर्ताओं को संभाला और संगठन को मजबूती दी।
सुधीर मुनगंटीवार ने जनसंपर्क का नया अध्याय शुरू किया। 2013 में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पार्टी ने बड़ी छलांग लगाई और प्रदेशाध्यक्ष से सीधे मुख्यमंत्री बनने का अनोखा रिकॉर्ड स्थापित हुआ। इसके बाद रावसाहेब दानवे, चंद्रकांत पाटील और चंद्रशेखर बावनकुळे ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पार्टी को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया।
जाति आधारित राजनीति करने वालों को भाजपा ने करारा जवाब दिया है
जिस भाजपा को कभी ‘शेटजी-भटजी’ की पार्टी कहकर आलोचना की जाती थी, उसी पार्टी ने 46 वर्षों में महाराष्ट्र में 11 प्रदेशाध्यक्ष बहुजन समाज से दिए, जो जाति आधारित राजनीति करने वालों के लिए करारा जवाब है।
आज एक कार्यकर्ता के रूप में प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाते हुए मुझे गर्व है कि सामान्य कार्यकर्ता से प्रदेशाध्यक्ष तक पहुंचना केवल भाजपा में ही संभव है। स्थानीय निकाय चुनावों में मिली सफलता केवल आंकड़े नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है।
‘भारतीयत्व ही राष्ट्रीयत्व का विचार जमीन तक पहुंचाया
भाजपा का संगठन केवल बैनर और सभाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ता ही इसकी असली ताकत हैं। ‘भारतीयत्व ही राष्ट्रीयत्व’ के विचार को हमने जमीनी स्तर तक पहुंचाया है। हमें कई बार अति राष्ट्रवादी कहा जाता है, लेकिन यदि देश के प्रति गहरा गर्व रखना दोष है, तो हम इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। ‘राष्ट्र प्रथम’ हमारी विचारधारा का मूल है। भाजपा समय के साथ तकनीक को अपनाते हुए एक ‘टेक-फ्रेंडली’ संगठन बन रही है, जिससे बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से रियल-टाइम संपर्क संभव हो पाया है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में चल रही योजनाओं को जनता तक पहुंचाना जरूरी है।
भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर
भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और महाराष्ट्र का 1 ट्रिलियन डॉलर का योगदान सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। इन योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और गांव स्तर की समस्याओं को सरकार तक ले जाना हर कार्यकर्ता का कर्तव्य है। यही ‘अंत्योदय’ का सच्चा अर्थ है।
जब भाजपा का हर कार्यकर्ता इस भावना से काम करेगा, तब ‘विकसित भारत’ का सपना साकार होगा, और विकसित महाराष्ट्र के बिना यह संभव नहीं है।
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