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महंगी गैस, बुझता चूल्हा और पेट की आग से उबलता गुस्सा: वसई में मजदूरों का फूटा आक्रोश

वसई गैस किल्लत के कारण मजदूरों का हाईवे जाम
गैस की किल्लत से परेशान मजदूरों ने वसई में हाईवे जाम किया

गैस की किल्लत ने छीनी रसोई की आग, वसई में मजदूरों का फूटा गुस्सा; हाईवे जाम

वसई, 27 मार्च 2026: वसई में शुक्रवार सुबह गैस की किल्लत ने ऐसा मानवीय संकट खड़ा कर दिया, जहां रोज़ कमाकर खाने वाले मजदूरों को रोटी और रोज़गार के बीच चुनाव करना पड़ रहा है। इसी मजबूरी और बढ़ते आक्रोश ने सैकड़ों लोगों को सड़क पर उतरने पर मजबूर कर दिया और देखते ही देखते मुंबई-अहमदाबाद हाईवे जाम हो गया। सुबह करीब 8 बजे वसई पूर्व के बर्मा सेल इलाके में बड़ी संख्या में मजदूर, कामगार और नौकरीपेशा लोग खाली 5 किलो गैस सिलेंडर लेकर जमा होने लगे। ये वे लोग हैं जिनके पास छोटे कमर्शियल गैस कनेक्शन हैं और जो आसपास की दुकानों से सिलेंडर रिफिल करवाकर अपने घर की रसोई चलाते हैं।

गैस की किल्लत ने इन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। जहां पहले 5 किलो गैस सिलेंडर का रिफिल करीब 480 रुपये में मिल जाता था, वहीं अब गैस मिलना लगभग बंद हो गया है। कुछ जगहों पर अगर गैस उपलब्ध भी है तो दुकानदार 1000 रुपये या उससे अधिक कीमत वसूल रहे हैं। ऐसे में मजदूरों के सामने गंभीर दुविधा खड़ी हो गई है कि वे गैस के लिए दर-दर भटकें या फिर अपने काम पर जाएं, क्योंकि दोनों में से किसी एक को चुनना ही पड़ रहा है।

दरअसल, 5 किलो का यह सिलेंडर कमर्शियल श्रेणी में आता है और जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा घरेलू गैस कनेक्शनों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके चलते कमर्शियल सिलेंडर की रिफिलिंग पर असर पड़ा है। इसका सीधा असर उन हजारों कामगारों पर पड़ा है जो इसी छोटे सिलेंडर के सहारे अपने परिवार का चूल्हा जलाते हैं।

घटना की पृष्ठभूमि भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण है। वसई पूर्व के बर्मा सेल इलाके में एचपी गैस एजेंसी की गाड़ियों के लिए पार्किंग की व्यवस्था है, जबकि गैस का वितरण वसई के पोंमान क्षेत्र से किया जाता है। कुछ दिन पहले इसी पार्किंग स्थल पर करीब 1000 गैस सिलेंडरों का वितरण किया गया था। इसके बाद से ही बाकी मजदूर और कामगार इसी जगह पर गैस मिलने की उम्मीद में आते-जाते रहे। इसी बीच यह अफवाह फैल गई कि 27 मार्च को बर्मा सेल के इसी पार्किंग स्थल पर गैस वितरित की जाएगी। इस खबर के चलते सुबह से ही लोग वहां जुटने लगे और कुछ ही समय में भीड़ सैकड़ों की संख्या में बदल गई।

जब मौके पर मौजूद गैस एजेंसी के कर्मचारियों ने गैस उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी, तो भीड़ का गुस्सा भड़क उठा। लोगों ने पहले विरोध जताया और फिर अचानक मुंबई-अहमदाबाद हाईवे की ओर बढ़ गए। वहां पहुंचकर उन्होंने खाली गैस सिलेंडर सड़क पर रख दिए और हाईवे की दोनों लेन जाम कर दीं। इसके चलते वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान कुछ स्थानों पर उग्र भीड़ द्वारा वाहन चालकों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और ट्रैफिक विभाग मौके पर पहुंचा। एसीपी नालासोपारा, एसीपी विरार, सीनियर पीआई वालिव सहित पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर किया गया और यातायात बहाल किया गया।

वहीं, वसई के तहसीलदार दीपक गायकवाड़ ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए नायब तहसीलदार और अन्य अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजा तथा गैस एजेंसी संचालक को तत्काल गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

यह घटना केवल एक प्रदर्शन या जाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस गहरी समस्या की ओर इशारा करती है जिसमें आम आदमी अपनी बुनियादी जरूरत—रसोई गैस—के लिए संघर्ष कर रहा है। जब चूल्हा बुझता है, तो उसका असर सिर्फ एक घर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में उसकी गूंज सुनाई देती है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्थानीय लोगों में नाराजगी अब भी बनी हुई है और वे जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

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