वसई | मेट्रो सिटी समाचार: देशभर में होली अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है, लेकिन वसई-विरार शहर में इस वर्ष होली का उत्सव एक विशेष सामाजिक संदेश के साथ मनाया जाएगा। हिंदू, मुस्लिम और ख्रिस्ती समुदाय के अनुयायी एक साथ मिलकर ‘सर्वधर्मीय होलिकोत्सव’ का आयोजन कर रहे हैं, जो सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक बनेगा।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी होली का त्योहार उत्साह के साथ मनाने की तैयारी जोरों पर है। घरों में पारंपरिक व्यंजन जैसे पुरणपोळी और विशेष पकवान तैयार किए जा रहे हैं। बाजारों में रंग, गुलाल, पिचकारियां और होली सामग्री की खरीदारी जारी है। इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगपंचमी मनाई जाएगी।
इसी पारंपरिक उत्सव के बीच वसई में सामाजिक एकता का अनोखा उदाहरण देखने को मिलेगा। होली, पवित्र रमजान माह और गुड फ्राइडे की पृष्ठभूमि में वसई के उमेळा स्थित ‘अभंग भवन’ में 3 मार्च को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक विशेष ‘सर्वधर्मीय होलिकोत्सव’ एवं ‘उपवासकालीन चिंतन’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “पाप का दहन और सत्य की विजय” का संदेश देना है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता गिरीज क्षेत्र के लेनी परेरा करेंगे। वहीं फादर मायकल जी, अपंग सेवा, कृपा फाउंडेशन, मद्यमुक्ती संघ, माणिकपूर, पाचू बंदर और सांडोर क्षेत्र के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य अपने जीवन अनुभव साझा करेंगे और आध्यात्मिक जागरूकता के लिए भक्तिगीत प्रस्तुत किए जाएंगे। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में ‘सामुदायिक प्रायश्चित्त विधी’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रतीकात्मक रूप से पाप-दहन कर कपाले पर राख लगाने की परंपरा निभाई जाएगी।
यह पहल वसई-विरार में धार्मिक सद्भाव, सामाजिक समरसता और एकता का सकारात्मक संदेश देने वाली मानी जा रही है।
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