Vasai Virar Journalists Protest: पत्रकारों ने मनपा अधिकारियों के विरोध में किया प्रदर्शन, प्रशासन ने मांगी माफी
वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा पत्रकारों के संपत्ति कर बकाया की एक गलत सूची प्रकाशित करने के बाद स्थानीय पत्रकारों में भारी आक्रोश देखने को मिला। इस सूची में उन पत्रकारों के नाम भी शामिल किए गए थे, जिन्होंने समय पर कर भुगतान किया था, और कुछ ऐसे नाम भी थे जिनकी संपत्तियां उनके नाम पर नहीं थीं

वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा पत्रकारों (Vasai Virar Journalists Protest) के संपत्ति कर बकाया की एक गलत सूची प्रकाशित करने के बाद स्थानीय पत्रकारों में भारी आक्रोश देखने को मिला। इस सूची में उन पत्रकारों के नाम भी शामिल किए गए थे, जिन्होंने समय पर कर भुगतान किया था, और कुछ ऐसे नाम भी थे जिनकी संपत्तियां उनके नाम पर नहीं थीं। इस गलती के कारण पत्रकारों की समाज में बदनामी हुई, जिससे नाराज होकर बुधवार को पत्रकारों ने महानगरपालिका मुख्यालय के बाहर दो घंटे तक जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान जब पुलिस ने मुख्यालय के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया, तो पत्रकारों ने वहीं धरना दे दिया। इस बीच, उपायुक्त (स्थापना) सदानंद गुरव और उपायुक्त (कर) समीर भूमकर ने पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित किया, लेकिन पत्रकारों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक कमिश्नर या समकक्ष अधिकारी नहीं आते, वे अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे।
आखिरकार, अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे पत्रकारों से मिलने धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूची आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई थी और महानगरपालिका की मंशा पत्रकारों को बदनाम करने की नहीं थी। उन्होंने कहा कि अधिकतम कर संग्रह सुनिश्चित करने के लिए यह सूची प्रकाशित की गई थी, लेकिन इसमें कुछ त्रुटियां रह गईं। उन्होंने पत्रकारों से इस गलती के लिए माफी मांगी और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
अधिकारियों द्वारा माफी मांगे जाने के बाद पत्रकारों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया। इस प्रदर्शन ने पत्रकारों की एकता और आत्मसम्मान की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाया। विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया गया, जिसमें सभी पत्रकार संगठनों, स्थानीय समाचार पत्रों और यूट्यूब चैनलों के पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। जो पत्रकार व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सके, उन्होंने भी अपने समर्थन का इजहार किया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पत्रकारों की एकजुटता किसी भी प्रशासनिक अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ी हो सकती है।
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