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POP मूर्तियों पर लाल पहचान चिन्ह अनिवार्य: वसई-विरार नगरपालिका का आदेश

वसई विरार मनपा ने POP मूर्तियों पर लाल रंग का पहचान चिन्ह अनिवार्य
वसई विरार मनपा ने POP मूर्तियों पर लाल रंग का पहचान चिन्ह अनिवार्य

वसई-विरार महानगरपालिका ने उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार POP (प्लास्टर ऑफ पेरिस) मूर्तियों पर लाल रंग का विशेष पहचान चिन्ह लगाने का निर्देश सभी मूर्तिकारों को दिया है।

वसई,22अगस्त: वसई-विरार शहर महानगरपालिका के पर्यावरण विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि उच्च न्यायालय की जनहित याचिका में दिनांक 9 जून 2025 को दिए गए अंतरिम आदेश के अनुसार POP से मूर्तियाँ बनाने की सशर्त अनुमति दी गई है। यह अनुमति नागपूर खंडपीठ द्वारा रिट याचिका  में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन पर आधारित है। यानी मूर्तिकारों को अब POP का उपयोग करने की छूट तो है, लेकिन सख्त नियमों के तहत।

  • पहचान के लिए लाल रंग का चिन्ह अनिवार्य

न्यायालय के आदेश के मुताबिक, POP से बनी हर मूर्ति के पीछे की ओर लाल रंग का तेल पेंट से बना विशेष पहचान चिन्ह लगाना अनिवार्य है। यह चिन्ह इस बात की स्पष्ट जानकारी देगा कि मूर्ति प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी है। इससे मूर्तियों की पहचान और रिकॉर्ड बनाए रखना आसान होगा। वसई-विरार महानगरपालिका ने स्पष्ट किया है कि ऐसा चिन्ह लगाए बिना कोई भी मूर्ति बेचना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

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  • मूर्तिकारों और विक्रेताओं से सख्त पालन का आग्रह

महानगरपालिका ने शहर के सभी मूर्तिकारों और विक्रेताओं से अपील की है कि वे न्यायालय द्वारा तय की गई शर्तों का सख्ती से पालन करें। पर्यावरण की दृष्टि से POP का उपयोग लगातार सवालों के घेरे में रहा है, और न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं कि ऐसी मूर्तियों की पहचान आसानी से हो सके और विसर्जन के समय उन्हें अलग तरीके से निपटाया जाए। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई मूर्तिकार या विक्रेता इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पहल

यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पर्यावरण-संरक्षण से जुड़ी एक बड़ी पहल भी है। POP मूर्तियाँ पानी में घुलती नहीं हैं और नदी-तालाबों को प्रदूषित करती हैं। ऐसे में न्यायालय और प्रशासन का उद्देश्य है कि नागरिकों को जागरूक किया जाए और मूर्तिकार POP के विकल्पों की ओर आकर्षित हों। लाल चिन्ह की अनिवार्यता मूर्तियों के रक्षित सुविसर्जन और पहचान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी।

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