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वसई-विरार में केंद्र और राज्य की कितनी योजनाएं? हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट, लेकिन VVCMC को वास्तव में कितना फंड मिला—समझिए पूरा हिसाब

वसई विरार में VVCMC के लिए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की योजनाएं, AMRUT 2.0, Surya Water, Deharji और PM e-Bus प्रोजेक्ट
वसई-विरार में हजारों करोड़ के सरकारी प्रोजेक्ट—लेकिन VVCMC को वास्तविक रूप से कितना फंड मिला?

वसई-विरार: वसई-विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र में केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार की कई बड़ी योजनाएं लागू हैं। पानी, सीवरेज, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शहर में चल रहे हैं या मंजूर किए जा चुके हैं।

लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है—इन परियोजनाओं के नाम पर दिखाई देने वाली हजारों करोड़ रुपये की पूरी रकम क्या सीधे VVCMC को मिली है?

जवाब है—नहीं।

Metro City Samachar ने वित्त वर्ष 2024-25, 2025-26 और चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 6 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध सरकारी और आधिकारिक रिकॉर्ड की पड़ताल की। इसमें कई बड़े प्रोजेक्ट की लागत और मंजूरी का विवरण मिलता है, लेकिन अलग-अलग सरकारी योजनाओं के तहत VVCMC को वास्तव में कितनी रकम मिली, उसमें से कितना खर्च हुआ और कितना पैसा बाकी है, इसकी एक consolidated और आसानी से समझ आने वाली सार्वजनिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आती।

यही वजह है कि किसी भी परियोजना की कुल लागत को सीधे “VVCMC को मिला सरकारी फंड” मान लेना सही नहीं होगा।

पहले समझिए—Project Cost और VVCMC को मिला Fund अलग-अलग हैं

सरकारी योजनाओं में आमतौर पर चार अलग-अलग आंकड़े होते हैं।

पहला—पूरे Project की कुल लागत।

दूसरा—सरकार की ओर से मंजूर की गई राशि।

तीसरा—वास्तव में सरकार द्वारा Release की गई रकम।

और चौथा—उसमें से VVCMC के खाते में प्राप्त और खर्च हुई रकम।

इन चारों को एक ही आंकड़ा मान लेने से सरकारी खर्च की वास्तविक तस्वीर बदल सकती है।

वसई-विरार से जुड़े कुछ बड़े प्रोजेक्ट की लागत हजारों करोड़ रुपये है, लेकिन इनमें कई परियोजनाएं MMRDA जैसी दूसरी सरकारी एजेंसियों द्वारा लागू की जा रही हैं। ऐसे में उनका पूरा Project Cost VVCMC को मिला Grant नहीं है।

AMRUT 2.0: पानी और सीवरेज के ₹1,070 करोड़ से अधिक के दो बड़े प्रोजेक्ट

केंद्र सरकार की AMRUT 2.0 योजना के तहत वसई-विरार के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

पहला है Vasai-Virar Water Supply Distribution System Project, जिसकी मंजूर Project Cost करीब ₹540.41 करोड़ है।

दूसरा है Vasai-Virar Sewerage Project Zone-3, जिसकी Project Cost करीब ₹529.74 करोड़ है।

इस तरह दोनों परियोजनाओं की कुल लागत करीब ₹1,070.15 करोड़ होती है।

सरकारी AMRUT रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों Projects का Status “Contract Awarded” है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में पानी के वितरण की व्यवस्था मजबूत करना और सीवरेज नेटवर्क को बेहतर बनाना है।

लेकिन महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इस ₹1,070.15 करोड़ में केंद्र सरकार का हिस्सा कितना है, महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा कितना है, VVCMC को कितना योगदान देना है और पिछले दो वित्तीय वर्षों में VVCMC को वास्तविक रूप से कितनी किस्त मिली?

उपलब्ध public project records में इसकी पूरी financial year-wise receipt trail एक जगह स्पष्ट नहीं मिलती।

इसलिए ₹1,070.15 करोड़ को VVCMC को मिला Grant नहीं, बल्कि दो Projects की कुल मंजूर लागत के रूप में समझना चाहिए।

Surya Water Supply Scheme: ₹1,329 करोड़ का प्रोजेक्ट, वसई-विरार को 170 MLD पानी

वसई-विरार की पानी की जरूरत के लिए Surya Regional Water Supply Scheme बेहद महत्वपूर्ण है।

MMRDA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस योजना की Contract Cost करीब ₹1,329.01 करोड़ है।

पूरी योजना की क्षमता करीब 403 MLD है, जिसमें से करीब 170 MLD पानी VVCMC के लिए निर्धारित किया गया है।

MMRDA के मुताबिक नवंबर 2023 से Phase-I के माध्यम से वसई-विरार को करीब 160 से 170 MLD treated water की आपूर्ति की जा रही है।

इससे शहर की लाखों की आबादी को अतिरिक्त पानी उपलब्ध हुआ है।

लेकिन यहां भी यह समझना जरूरी है कि ₹1,329.01 करोड़ VVCMC के बैंक खाते में आया फंड नहीं है।

यह MMRDA द्वारा विकसित किए गए पूरे Regional Water Supply Project की लागत है। VVCMC इस परियोजना का beneficiary है।

यानि शहर को इसका सीधा फायदा पानी के रूप में मिल रहा है, लेकिन पूरे Project Cost को महानगरपालिका को दिया गया Grant नहीं कहा जा सकता।

Deharji Project: वसई-विरार के लिए भविष्य में 190 MLD अतिरिक्त पानी

वसई-विरार की भविष्य की पानी की जरूरत के लिए Deharji Medium Project भी बेहद अहम माना जा रहा है।

MMRDA के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक इस परियोजना से करीब 255 MLD पानी उपलब्ध होने की योजना है।

इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा, करीब 190 MLD पानी VVCMC के लिए आरक्षित किया गया है।

बाकी पानी Palghar क्षेत्र और दूसरे beneficiaries के लिए निर्धारित है।

MMRDA के मुताबिक Deharji Project के लिए अब तक करीब ₹1,933.04 करोड़ उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसमें जमीन अधिग्रहण, Project construction और अन्य संबंधित खर्च शामिल हैं।

Project की Physical Progress करीब 82 प्रतिशत बताई गई है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लेकिन यहां भी वही फर्क लागू होता है।

₹1,933.04 करोड़ VVCMC को दिया गया Grant नहीं है।

यह Deharji Project के लिए MMRDA और संबंधित सरकारी व्यवस्था के तहत लगाया जा रहा Project Fund है।

इस परियोजना से VVCMC को मुख्य लाभ करीब 190 MLD अतिरिक्त पानी के रूप में मिलने वाला है।

PM e-Bus Sewa: वसई-विरार को 100 इलेक्ट्रिक बसें

Public Transport के क्षेत्र में केंद्र सरकार की PM e-Bus Sewa योजना भी वसई-विरार के लिए महत्वपूर्ण है।

केंद्र सरकार के records में Vasai-Virar के लिए कुल 100 Electric Buses का provision दर्ज है।

इन बसों के संचालन के लिए Depot और Charging Infrastructure भी तैयार किया जाना है।

योजना के तहत नालासोपारा और नवघर क्षेत्र में संबंधित infrastructure विकसित किए जाने की प्रक्रिया सामने आई है।

उपलब्ध जानकारियों के अनुसार Depot-related infrastructure के लिए सरकारी हिस्से की राशि भी निर्धारित की गई थी और इसकी कुछ रकम प्राप्त होने की जानकारी सामने आ चुकी है।

लेकिन 2024-25 से अक्टूबर 2026 तक पूरी PM e-Bus योजना में VVCMC को कुल कितना cash grant प्राप्त हुआ, इसकी consolidated financial statement सार्वजनिक रूप से एक जगह आसानी से उपलब्ध नहीं है।

इसलिए 100 e-Buses की मंजूरी और VVCMC को प्राप्त वास्तविक Grant—दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

National Clean Air Programme: प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी सरकारी फंड

वसई-विरार शहर महानगरपालिका National Clean Air Programme यानी NCAP के तहत भी काम कर रही है।

VVCMC ने अपनी वेबसाइट पर NCAP से संबंधित कुछ documents और Utilization Certificate भी उपलब्ध कराए हैं।

इसका अर्थ है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कामों के लिए सरकारी funding प्राप्त हुई है और उसका utilization भी हुआ है।

लेकिन अलग-अलग financial years में NCAP के तहत कुल कितना fund sanction हुआ, कितना VVCMC को मिला, कितना खर्च किया गया और कितना balance है—इसका consolidated statement आम नागरिक के लिए सीधे और आसान format में उपलब्ध नहीं दिखाई देता।

स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की योजनाएं

केंद्र सरकार की Swachh Bharat Mission-Urban सहित विभिन्न योजनाओं के तहत Solid Waste Management, Public Toilets, Waste Processing और स्वच्छता से जुड़े कई काम महानगरपालिका क्षेत्र में किए जाते रहे हैं।

VVCMC के budgets में भी Waste Management और related infrastructure पर बड़ी राशि के provisions दिखाई देते हैं।

लेकिन Budget Provision, Expected Government Grant और वास्तव में प्राप्त Grant तीन अलग-अलग चीजें हैं।

इसलिए केवल Budget में किसी सरकारी अनुदान की अपेक्षित राशि दर्ज होने को वास्तविक fund receipt नहीं माना जा सकता।

वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित Grant Release Order और VVCMC की Receipt Entry देखना जरूरी है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र और राज्य की कई योजनाएं

वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से संबंधित स्वास्थ्य योजनाएं भी लागू हैं।

इनमें National Health Mission, Urban Health Programmes, Ayushman Arogya Mandir और महाराष्ट्र सरकार की आपला दवाखाना जैसी योजनाएं शामिल हैं।

इन योजनाओं के माध्यम से Urban Health Centers, Doctors, Medical Staff, medicines और primary healthcare infrastructure पर खर्च किया जाता है।

लेकिन पिछले दो financial years में इन सभी योजनाओं से VVCMC को अलग-अलग कितनी रकम मिली, इसकी एक consolidated public list फिलहाल आसानी से उपलब्ध नहीं है।

रोजगार और शहरी गरीबों के लिए DAY-NULM जैसी योजनाएं

शहर में Deendayal Antyodaya Yojana-National Urban Livelihoods Mission यानी DAY-NULM के तहत भी योजनाएं लागू हैं।

इसका उद्देश्य शहरी गरीबों के लिए Skill Development, Self Employment, Self Help Groups और livelihood opportunities बढ़ाना है।

इसी तरह Street Vendors से संबंधित PM SVANidhi जैसी केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी शहरी निकाय क्षेत्रों के beneficiaries को मिलता है।

लेकिन यहां भी योजना का beneficiary-based financial flow और VVCMC को administrative या implementation level पर प्राप्त government funding को अलग-अलग देखना जरूरी है।

Housing Schemes: PMAY के तहत भी लाभ

केंद्र सरकार की Pradhan Mantri Awas Yojana-Urban यानी PMAY-U और अब PMAY-U 2.0 जैसे programmes भी शहरी आवास के लिए लागू हैं।

लेकिन Housing Scheme में beneficiary subsidy, project assistance और municipal fund तीन अलग-अलग financial components हो सकते हैं।

इसलिए PMAY के तहत beneficiaries को मिलने वाली सहायता को सीधे VVCMC को मिला fund नहीं कहा जा सकता।

क्या वसई-विरार में ₹4,000 करोड़ से ज्यादा के सरकारी प्रोजेक्ट चल रहे हैं?

अगर केवल तीन बड़े Infrastructure Projects देखें—

AMRUT 2.0 के दो Projects: ₹1,070.15 करोड़

Surya Water Supply Scheme: ₹1,329.01 करोड़

Deharji Project में उपलब्ध कराई गई राशि: करीब ₹1,933.04 करोड़

तो इन तीनों को मिलाकर आंकड़ा ₹4,300 करोड़ से ज्यादा होता है।

यह निश्चित तौर पर बताता है कि वसई-विरार से जुड़े बड़े Infrastructure Projects में हजारों करोड़ रुपये का सरकारी निवेश हो रहा है।

लेकिन दोबारा स्पष्ट कर दें—

यह ₹4,300 करोड़ VVCMC को मिला Grant नहीं है।

इसमें MMRDA के Regional Projects और दूसरे Government Infrastructure Investments भी शामिल हैं।

यही फर्क जनता के लिए समझना सबसे जरूरी है।

फिर VVCMC को पिछले दो साल में वास्तव में कितना Government Fund मिला?

यही इस पड़ताल का सबसे बड़ा और अभी तक अधूरा सवाल है।

वित्त वर्ष 2024-25, 2025-26 और चालू 2026-27 में केंद्र तथा महाराष्ट्र सरकार की अलग-अलग योजनाओं से—

कितनी रकम Sanction हुई?

कितनी रकम Release हुई?

कितनी VVCMC के खाते में आई?

कितनी रकम खर्च हुई?

और कितनी रकम अभी Unspent Balance के रूप में पड़ी है?

इन सभी सवालों का जवाब देने वाला एक consolidated Scheme-wise Statement VVCMC की सार्वजनिक वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध नहीं दिखाई देता।

महानगरपालिका के Budget और Income-Expenditure documents उपलब्ध हैं, लेकिन आम नागरिक के लिए हर Government Scheme की पूरी Money Trail अलग-अलग documents से जोड़कर समझना आसान नहीं है।

जनता के सामने क्या जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए?

अगर VVCMC अपनी वेबसाइट पर प्रत्येक केंद्र और राज्य सरकार की योजना के लिए एक consolidated table जारी करे, जिसमें—

Scheme का नाम,

Sanctioned Amount,

Central Government Share,

State Government Share,

VVCMC Share,

Actual Fund Received,

Expenditure,

और Remaining Balance दिया जाए,

तो शहर के नागरिकों को साफ तौर पर पता चल सकता है कि किस योजना के लिए सरकार ने कितना पैसा दिया और जमीन पर कितना खर्च हुआ।

इसके साथ संबंधित Utilization Certificate और Project Status भी सार्वजनिक किया जाना Transparency की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।

Metro City Samachar की पड़ताल का निष्कर्ष

वसई-विरार शहर में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से जुड़े कई बड़े Infrastructure और Welfare Projects लागू हैं।

पानी और सीवरेज में AMRUT 2.0 के तहत करीब ₹1,070 करोड़ के Projects मंजूर हैं।

Surya Water Supply Scheme करीब ₹1,329 करोड़ की Regional Project है और उससे VVCMC को करीब 170 MLD पानी का लाभ मिल रहा है।

Deharji Project पर करीब ₹1,933 करोड़ उपलब्ध कराए जाने का सरकारी रिकॉर्ड है, जिसमें भविष्य में VVCMC के लिए करीब 190 MLD पानी निर्धारित है।

PM e-Bus Sewa के तहत शहर के लिए 100 Electric Buses का provision है।

इसके अलावा स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं भी लागू हैं।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि—

Project Cost और VVCMC को मिला वास्तविक Government Fund एक ही चीज नहीं है।

इसलिए हजारों करोड़ के Project Cost को जोड़कर यह कहना कि उतनी पूरी रकम VVCMC को मिल चुकी है, सही नहीं होगा।

अब असली सवाल यह है कि 1 अप्रैल 2024 से 6 अक्टूबर 2026 तक केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से VVCMC को योजना-वार वास्तव में कितनी राशि प्राप्त हुई और उसमें से कितनी राशि शहर के विकास पर खर्च हुई?

इसका निर्णायक जवाब VVCMC के Grant Register, Government Sanction Orders, Fund Release Orders, Scheme-wise Receipts, Utilization Certificates और Expenditure Statements सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।

Metro City Samachar इस विषय पर उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और योजना-वार खर्च की पड़ताल आगे भी जारी रखेगा।

VVCMC ACCOUNTABILITY FILES PART 4 -THE FINAL CHAPTER : वसई विरार शहर महानगरपालिका की समस्या व्यक्ति है या व्यवस्था?

Written by
Metro City Samachar

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