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Occupancy Certificate: बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) के फ्लैट खरीदना जोखिमभरा: जानिए इससे जुड़ी अहम बातें

अगर किसी बिल्डर ने बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) के फ्लैट बेचा है. . जानिए , कैसे और कहाँ करें शिकायत

मुंबई: बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate) के फ्लैट खरीदना जोखिमभरा हो सकता है। OC एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जो यह प्रमाणित करता है कि किसी बिल्डिंग का निर्माण सभी नियमों और मानकों के अनुरूप हुआ है और उसमें निवास करना कानूनी रूप से सुरक्षित है।

चाहे आप खरीदार हों या मालिक, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) के महत्व को समझना जरुरी है। सत्या ग्रुप के सीएमडी विकास भसीन का कहना है कि, “ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) घर खरीदार के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट हैं। अगर ये जरूरी दस्तावेज ना हों तो महानगरपालिका आपको अपने घर से बाहर कर सकती हैं। इसलिए प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करने से पहले,लोगों को यह दो बार चेक कर लेना चाहिए कि तमाम सर्टिफिकेट्स और अप्रूवल जरूर हो।”

OC और CC क्यों हैं महत्वपूर्ण?

सत्या ग्रुप के सीएमडी विकास भसीन का कहना है कि “ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) घर खरीदार के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। अगर ये जरूरी दस्तावेज न हों, तो महानगरपालिका आपको अपने घर से बाहर कर सकती है। इसलिए प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले इन सर्टिफिकेट्स की जांच करना बेहद जरूरी है।”

बिना OC के फ्लैट खरीदने के संभावित जोखिम:

  1. अवैध निर्माण का खतरा: बिना OC के, बिल्डिंग को अवैध माना जा सकता है, जिससे भविष्य में विध्वंस की संभावना बनी रहती है।
  2. बिजली-पानी कनेक्शन में बाधा: OC के अभाव में स्थायी बिजली, पानी और गैस कनेक्शन प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।
  3. ऋण और पुनर्विक्रय में कठिनाई: अधिकांश बैंक बिना OC वाले फ्लैट पर होम लोन देने से कतराते हैं, जिससे पुनर्विक्रय भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
  4. कानूनी विवाद का जोखिम: नगर निगम या अन्य सरकारी एजेंसियां बिना OC वाली बिल्डिंग को अवैध घोषित कर सकती हैं, जिससे कानूनी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

बिना OC के फ्लैट खरीदने से पहले ध्यान देने योग्य बातें:

  • बिल्डर से स्पष्टीकरण मांगें: यदि OC किसी तकनीकी कारण से रुका है, तो समाधान की मांग करें। यदि निर्माण अवैध है, तो निवेश से बचें।
  • अन्य दस्तावेज़ों की जांच करें: कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) और अन्य संबंधित दस्तावेज़ों की सत्यता सुनिश्चित करें। हालांकि, CC अकेले पर्याप्त नहीं होता।
  • RTI के माध्यम से जानकारी प्राप्त करें: संबंधित नगर निगम या प्राधिकरण से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगें कि बिल्डिंग को OC क्यों नहीं मिला।
  • कानूनी सलाह लें: किसी रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी वकील से परामर्श करें ताकि भविष्य में कानूनी समस्याओं से बचा जा सके।

OC के बिना कब्जा देने पर क्या जुर्माना है?

पोद्दार हाउसिंग एंड डेवलपमेंट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) रोहित पोद्दार का कहना है कि अगर डिलीवरी तय समय पर हो जाती है, तो OC पाने में देरी पर कोई जुर्माना नहीं होता। लेकिन यदि तय समय से ज्यादा देरी होती है, तो डेवलपर को खरीदार को ब्याज देना पड़ता है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 के तहत बिल्डर के खिलाफ ‘सेवा में कमी‘ के लिए शिकायत भी की जा सकती है।

OC प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज: OC प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान
  • कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (Commencement Certificate)
  • कंप्लीशन सर्टिफिकेट (Completion Certificate)
  • पॉल्यूशन बोर्ड, एयरपोर्ट अथॉरिटी आदि से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC)
  • प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद

कहाँ करें शिकायत ?

अगर किसी बिल्डर ने बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) के फ्लैट बेचा है और आप इसे ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) मानते हैं, तो आप निम्नलिखित जगहों पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं:

1. रेरा (RERA) में शिकायत दर्ज करें

  • महाराष्ट्र रेरा (MahaRERA) की आधिकारिक वेबसाइट: https://maharera.mahaonline.gov.in
  • यहाँ पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
  • RERA के तहत, बिल्डर पर जुर्माना लगाया जा सकता है और आपको उचित मुआवजा मिल सकता है।

2. उपभोक्ता फोरम (Consumer Court) में शिकायत करें

  • National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC)
  • वेबसाइट: https://consumerhelpline.gov.in
  • ज़िला उपभोक्ता फोरम (District Consumer Forum) में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • अगर फ्लैट की कीमत ₹1 करोड़ से कम है तो जिला फोरम, ₹1-₹10 करोड़ के लिए राज्य फोरम और ₹10 करोड़ से अधिक मामलों के लिए राष्ट्रीय फोरम में शिकायत करें।

3. नगर निगम / महानगर पालिका में शिकायत करें

  • संबंधित म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (Municipal Corporation) में शिकायत दर्ज कराएं।
  • वसई-विरार के लिए वसई-विरार नगर निगम (VVMC) में शिकायत की जा सकती है।

4. Competition Commission of India (CCI)

  • अगर बिल्डर की ग़लत व्यापारिक गतिविधियों (Unfair Trade Practices) से आपको नुकसान हुआ है, तो CCI में शिकायत कर सकते हैं।
  • वेबसाइट: https://www.cci.gov.in

5. लोकल पुलिस और कोर्ट में केस करें

  • आप बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी (Fraud) और अनुबंध के उल्लंघन (Breach of Contract) के तहत पुलिस में FIR दर्ज करा सकते हैं।
  • सिविल कोर्ट में जाकर कानूनी कार्यवाही भी कर सकते हैं।

6. RTI (सूचना का अधिकार) डालें

  • अगर OC जारी नहीं हुआ है, तो संबंधित नगर निगम या प्राधिकरण में RTI डालकर इसकी स्थिति की जानकारी लें
  • इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि बिल्डर ने नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं।

शिकायत दर्ज करने से पहले ध्यान दें:

✔️ सभी दस्तावेज़ (बिक्री अनुबंध, भुगतान रसीद, बिल्डर की बातचीत, RERA रजिस्ट्रेशन नंबर आदि) सुरक्षित रखें।
✔️ पहले बिल्डर को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजें और जवाब मांगें।
✔️ यदि बिल्डर संतोषजनक उत्तर नहीं देता, तो उपरोक्त विकल्पों में से किसी पर शिकायत दर्ज करें।

निष्कर्ष:

विशेषज्ञों का मानना है कि OC के बिना फ्लैट खरीदना वित्तीय और कानूनी दृष्टिकोण से जोखिमभरा हो सकता है। इसलिए, निवेश से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ण जांच और सत्यापन आवश्यक है।

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