मुंबई पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशानुसार गणेशोत्सव के दौरान रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक डीजे और पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर प्रतिबंध लगाया है, शोर 50 डीबी तक सीमित रखा गया है।
मुंबई, 13 अगस्त: बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गणेशोत्सव और नवरात्रि जैसे उत्सवों के दौरान “डीजे” या डॉल्बी सिस्टम का उपयोग अपराध ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और शांति के लिए खतरा है। अदालत ने आवाज प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत पुलिस को सख्त प्रवर्तन का निर्देश दिया है, जो नियम रात में 45–50 dB और दिन में 55–65 dB सीमा निर्धारित करते हैं । मुंबई पुलिस ने इस आदेश को लागू करते हुए गणेश पंडालों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच डीजे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। पारंपरिक वाद्ययंत्र जैसे ढोल-ताशा को ही इस दौरान अनुमति दी गई है। उल्लंघन करने पर उपकरण जब्त करने, जुर्माना लगाने और पंडाल का लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई संभव है।
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संघर्ष नहीं, सम्मान: पारंपरिक संकेत पर भरोसा
अतीत में तेज आवाज से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे सुनने की क्षमता में गिरावट, उच्च रक्तचाप, मानसिक तनाव, इनके मद्देनजर अब दिशा बदली है। कई मंदिरों और पंडालों में पारंपरिक वाद्ययंत्रों के इस्तेमाल का समर्थन बढ़ा है, जो स्थानीय जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का भी संरक्षण करते हैं। इसमें आम नागरिकों का प्रयास भी महत्वपूर्ण है, जैसे मस्जिदों ने अजान के दौरान डेसिबल कम किए हैं और मॉनिटरिंग मशीन लगाई है, जो सकारात्मक उदाहरण है। ऐसे मिलेजुले प्रयास शांति और उत्सव दोनों का सम्मान करते हैं।
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सुरक्षा और व्यवस्था: जिम्मेदार सामाजिक समझौता
जब उत्सव और सड़क संगठन दोनों साथ-साथ चलते हैं, तब संस्कृति का मर्म जीवित रह सकता है। मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ कानूनी आदेश का पालन नहीं, बल्कि शहरवासियों की सुरक्षा की प्रतिबद्धता का संकेत है। ऐसे समय में यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि पारंपरिक संगीत ना सिर्फ कानों को सुखद महसूस कराता है, बल्कि त्योहार की असली ऊर्जा को भी बनाए रखता है, वह शांति और आनंद का संगीत, ना कि सिर्फ तेज ध्वनि का शोर।
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