मुंबई: महाराष्ट्र में चल रहे गणेशोत्सव के बीच DJ, लाउडस्पीकर, एम्प्लीफायर और पटाखों से होने वाले ध्वनि तथा वायु प्रदूषण का मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और जनहित याचिका यानी Suo Motu PIL शुरू कर दी है।
न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला के. गोखले की खंडपीठ ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब सामान्य तौर पर जुलूसों में संगीत, लाउडस्पीकर और एम्प्लीफायर के इस्तेमाल की अनुमति रात 10 बजे तक बताई जा रही है, तो कुछ अवसरों पर तेज संगीत आधी रात तक बजाने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य धार्मिक उत्सवों या जुलूसों को रोकना नहीं है। अदालत की चिंता यह है कि उत्सव मनाते समय अन्य नागरिकों के कानूनी अधिकार, स्वास्थ्य और शांत वातावरण का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने खुद क्यों लिया संज्ञान?
अदालत ने कहा कि त्योहारों और जुलूसों के दौरान तेज आवाज के कारण बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित होते हैं। विशेष रूप से बीमार लोगों, वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थियों और बच्चों पर अत्यधिक शोर का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
खंडपीठ ने मौजूदा Noise Pollution Rules और अन्य वैधानिक प्रावधानों के बावजूद जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए। इसी आधार पर अदालत ने मामले को स्वतः जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा।
DJ को लेकर अदालत का बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान DJ और अत्यधिक तेज ध्वनि वाले साउंड सिस्टम का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि धार्मिक और सार्वजनिक जुलूसों में DJ, लाउडस्पीकर तथा एम्प्लीफायर के इस्तेमाल के लिए वास्तव में क्या नियम लागू हैं, अनुमति किन परिस्थितियों में दी जाती है और नियमों का उल्लंघन होने पर प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है।
राज्य की ओर से महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठ्ये अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने सरकार से लागू कानूनों और उनके पालन का विस्तृत ब्योरा देने को कहा।
पटाखों पर भी हाईकोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
मामला केवल DJ या लाउडस्पीकर तक सीमित नहीं है। अदालत ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण पर भी सवाल उठाए।
अदालत ने मुंबई में पहले से मौजूद वायु प्रदूषण की समस्या का उल्लेख करते हुए प्रथम दृष्टया राय व्यक्त की कि ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ाने वाले पटाखों पर रोक लगाने की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए।
सड़क पर अचानक तेज पटाखे फूटने से वाहन चालकों, दोपहिया वाहन सवारों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका पर भी अदालत ने चिंता जताई।
महत्वपूर्ण: इसका अर्थ यह नहीं है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई या पूरे महाराष्ट्र में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। फिलहाल यह अदालत की प्रारंभिक टिप्पणी है। अंतिम स्थिति आगे के लिखित आदेशों से स्पष्ट होगी।
सरकार और एजेंसियों से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार सहित संबंधित अधिकारियों/एजेंसियों को नोटिस जारी किया है। रिपोर्टों के अनुसार इनमें यातायात पुलिस, नगर विकास विभाग, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बृहन्मुंबई महानगरपालिका से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
अदालत यह जानना चाहती है कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए मौजूदा कानून क्या हैं, उनका पालन किस तरह कराया जा रहा है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वास्तव में कितनी कार्रवाई हुई है।
मामले को 22 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए रखा गया।
2016 के आदेश भी चर्चा में
इसी समय बॉम्बे हाईकोर्ट में पुणे से संबंधित एक अलग PIL भी लंबित है। उसमें आरोप लगाया गया है कि त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण रोकने से संबंधित हाईकोर्ट के 2016 के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा।
उस अलग याचिका में ध्वनि स्तर की स्वतंत्र निगरानी, calibrated sound-level meters और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। उस मामले को 5 अक्टूबर को सुनवाई के लिए रखा गया है।
दोनों मामलों को एक ही मामला समझना उचित नहीं होगा। 21 सितंबर को न्यायमूर्ति कुलकर्णी और न्यायमूर्ति गोखले की खंडपीठ द्वारा शुरू किया गया मामला स्वतः संज्ञान वाली अलग कार्यवाही है।
क्या अब मुंबई में DJ बंद हो गया?
नहीं। उपलब्ध आदेश और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई या पूरे महाराष्ट्र में DJ पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
अदालत ने DJ, लाउडस्पीकर और एम्प्लीफायर के इस्तेमाल, निर्धारित समय तथा ध्वनि-सीमा के पालन पर सवाल उठाए हैं और सरकार से जवाब मांगा है।
इसी तरह पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध भी अभी अंतिम आदेश नहीं है।
इसलिए सोशल मीडिया पर “हाईकोर्ट ने DJ और पटाखे पूरी तरह बैन किए” जैसे दावों से सावधान रहने की जरूरत है।
मामला मुंबई और MMR के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
गणेशोत्सव के दौरान मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर और वसई-विरार सहित MMR में बड़ी संख्या में सार्वजनिक मंडल और विसर्जन जुलूस निकलते हैं।
हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई में यदि ध्वनि-सीमा, समय, DJ, पटाखों, पुलिस कार्रवाई या निगरानी व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त निर्देश जारी होते हैं, तो उनका असर उत्सव आयोजकों, पुलिस, महानगरपालिकाओं और साउंड सिस्टम संचालकों पर पड़ सकता है।
फिलहाल मौजूदा नियमों का पालन करना अनिवार्य है और हाईकोर्ट के आगामी लिखित आदेश पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
घटनाक्रम
21 सितंबर 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ध्वनि और वायु प्रदूषण के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर PIL शुरू की।
22 सितंबर 2026: सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब के लिए मामला आगे की सुनवाई पर रखा गया।
5 अक्टूबर 2026: पुणे में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित अलग PIL पर सुनवाई प्रस्तावित है।
✅ हाईकोर्ट ने DJ, लाउडस्पीकर और देर रात तेज संगीत की अनुमति पर सवाल उठाए हैं।
✅ पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता और प्रतिबंध पर प्रथम दृष्टया विचार व्यक्त किया है।
✅ राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से नियमों तथा उनके क्रियान्वयन का जवाब मांगा गया है।
स्रोत: बॉम्बे हाईकोर्ट की 21 सितंबर की कार्यवाही पर आधारित रिपोर्टिंग—Indian Express, Free Press Journal, Bar & Bench और Loksatta।