मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के निर्देशों के पालन में देरी को लेकर नागरिक और पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने सोमवार की सुनवाई में जागरूकता अभियानों के साथ जमीनी कार्रवाई की जरूरत बताई।
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने BMC, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुंबई पुलिस की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामों की समीक्षा की। पीठ ने त्योहारों के आयोजन के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया।
सुनवाई में शिकायत दर्ज कराने के लिए उपलब्ध व्यवस्था और ध्वनि स्तर की निगरानी के साधनों का मुद्दा भी उठा। अदालत ने ऐसी सुलभ प्रक्रिया की जरूरत बताई, जिसमें नागरिकों को शिकायत के लिए कई विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर जागरूकता तथा नियमों के पालन को मजबूत करने को कहा गया। अदालत ने शुरू किए गए प्रचार प्रयासों की सराहना की, लेकिन उनके साथ प्रभावी कार्रवाई जरूरी बताई। अगली सुनवाई 25 नवंबर को बताई गई है।



