Vasai Virar : वसई–विरार शहर महानगरपालिका का चुनाव इस बार केवल नगरसेवक चुनने की प्रक्रिया नहीं है; यह शहरी शासन की विश्वसनीयता पर जनमत है। पिछले डेढ़ दशक में शहर जिस अव्यवस्थित विस्तार, अवैध निर्माण, Residential Encroachment और कॉमन एरिया पर कब्ज़े का साक्षी बना है, वह किसी आकस्मिक भूल का परिणाम नहीं—बल्कि MRTP Act के व्यवस्थित दुरुपयोग, जानबूझकर की गई प्रशासनिक देरी और न्यायालयी आदेशों को निष्प्रभावी बनाने की संस्कृति का नतीजा है।
यह आलेख उन तीन परतों को एक साथ रखता है—
- नोटिस भेजकर निष्क्रिय रहना (Notice-Raj)
- उच्च न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन में जानबूझकर देरी
- अवैध निर्माण को लाभ का मॉडल बनाने वाला संस्थागत नेटवर्क
- MRTP Act: शक्तिशाली कानून, कमज़ोर अमल
महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 (MRTP Act) की मंशा स्पष्ट है—योजना आधारित विकास, आरक्षित भूमि की रक्षा और अनधिकृत निर्माण पर त्वरित दंडात्मक कार्रवाई।
धारा 43–44 (बिना अनुमति निर्माण निषिद्ध), धारा 52 (दंड), धारा 53 (Stop-Work/Removal Notice) और धारा 54 (Summary Demolition) प्रशासन को समयबद्ध और निर्णायक कदम उठाने का अधिकार देती हैं।
यदि इसके बावजूद अवैध निर्माण वर्षों तक खड़े रहते हैं, तो निष्कर्ष एक ही है: विफलता कानून की नहीं, अमल की है—और अमल की विफलता अक्सर नीयत की विफलता होती है।
- आरक्षित भूमि पर 41 बहुमंज़िला इमारतें: नही मिला न्याय
STP और डंपिंग ग्राउंड जैसी Development Plan (DP)-आरक्षित भूमि पर 41 बहुमंज़िला इमारतों का खड़ा हो जाना किसी एक अधिकारी की चूक नहीं, बल्कि बहु-स्तरीय चुप्पी का परिणाम था।
न्यायालयी आदेशों के बाद ध्वस्तीकरण हुआ—पर तब तक 2,500–3,500 परिवार विस्थापित हो चुके थे। यह न्याय का अंत नहीं, बल्कि न्याय में देरी का सामाजिक दुष्परिणाम था।
यहाँ मूल प्रश्न यह नहीं कि इमारतें क्यों गिरीं; प्रश्न यह है कि वे बनती कैसे रहीं, बेची कैसे गईं और रोकी क्यों नहीं गईं?
- ‘MRTP नोटिस-राज’: कानून का दिखावा, अवैधता का संरक्षण
MRTP Act के तहत नोटिस कार्रवाई की शुरुआत है, अंतिम बिंदु नहीं। लेकिन व्यवहार में बना Notice-Raj मॉडल यह करता है:
- अवैध निर्माण को शुरुआती चरण में नहीं रोका जाता
- धारा 53 के तहत नोटिस जारी कर “कार्रवाई” काग़ज़ पर दिखा दी जाती है
- धारा 54 के तहत demolition या धारा 52 के तहत prosecution नहीं होता
- समय खींचा जाता है—निर्माण पूरा, फ्लैट बिके
- वर्षों बाद चयनात्मक ध्वस्तीकरण/अदालती आदेश
यह Economic Facilitation of Illegal Construction है जहाँ जोखिम शून्य बिल्डर का और अधिकतम आम नागरिक का होता है।
कानूनी रूप से यह Dereliction of Statutory Duty, Colorable Exercise of Power और सार्वजनिक हित के विरुद्ध सुनियोजित निष्क्रियता है।
- जनता से धोखा: फर्जी वैधता का भ्रम
“नोटिस आया है, पर कार्रवाई नहीं”—यह वाक्य वर्षों तक फर्जी वैधता का पर्याय बना रहा।
बिना अनुमति बनी इमारतें भ्रामक दस्तावेज़ों के सहारे बेची गईं। खरीदारों ने सोचा यदि सच में अवैध होता, तो गिरा दिया जाता। यही भ्रम इस SCAM का सबसे खतरनाक हथियार है जहाँ बिल्डर और तंत्र बचते हैं, आम नागरिक फँसता है।
- Residential Encroachment: सुविधा नहीं, जीवन-सुरक्षा का प्रश्न
शहर की सैकड़ों सोसाइटियों में:
- कॉमन वॉकवे
- पार्किंग
- सीढ़ियाँ
- फायर-एग्ज़िट
पर स्थायी शेड, एक्सटेंशन और स्टोरेज बन गए। परिणाम:
- Emergency access बाधित
- Fire-Safety और OC शर्तों का उल्लंघन
- सामुदायिक अधिकारों का हनन
इन मामलों को “सोसाइटी का आंतरिक विषय” बताकर टालना, जबकि Society Bye-Laws और Fire Regulations इसे नगरपालिका की जिम्मेदारी ठहराते हैं—यह प्रवर्तन से पलायन है।
- उच्च न्यायालयों के आदेश और जानबूझकर देरी
उच्च न्यायालयों के आदेश सलाह नहीं, बाध्यकारी संवैधानिक निर्देश हैं। आदेश के बाद भी यदि:
- फाइल-नोटिंग और बैठकों से समय काटा जाए
- ज़मीन पर कार्रवाई न हो
- “मानसून/कानून-व्यवस्था/मैनपावर” जैसे बहाने दिए जाएँ
तो यह Wilful Disobedience है।
Supreme Court of India ने बार-बार कहा है – अनधिकृत निर्माण पर Zero Tolerance और देरी स्वयं में मिलीभगत का संकेत है।
धारा 53 + 54 के बाद विवेक समाप्त हो जाता है; कार्रवाई अनिवार्य होती है। देरी = Statutory Violation + Contempt।
- ‘Colorable Compliance’: काग़ज़ी पालन, ज़मीनी अवहेलना
नोटिस, पंचनामा, रिपोर्ट—सब तैयार।
लेकिन demolition, prosecution, utilities disconnection—कुछ नहीं।
अदालतें इसे Colorable Compliance मानती हैं जो स्वयं अवैध है, क्योंकि यह न्यायिक आदेश को निष्प्रभावी बनाता है।
- भ्रष्टाचार का आर्थिक मॉडल
ED की चार्जशीट, संपत्ति-अटैचमेंट और जब्ती ने दिखाया कि अवैध निर्माण एक लाभकारी उद्योग बन चुका था।
नोटिस-राज और न्यायालयी देरी इस उद्योग के ऑपरेटिंग टूल बने।
लाभ किसे?
- बिल्डर: Risk-free illegal profit
- नेटवर्क/अधिकारी: Influence और Bribe economy
- शहर: अराजक विकास
- नागरिक: विस्थापन और आर्थिक तबाही
- शहरी और सामाजिक कीमत
- 2,500–3,500 परिवारों का विस्थापन
- Flooding, sanitation failure, fire risk
- प्रशासन और न्यायपालिका पर भरोसे का क्षरण
सबसे खतरनाक परिणाम: न्याय आदेश काग़ज़ पर, अवैधता ज़मीन पर।
- जवाबदेही की श्रृंखला
यदि नोटिस के बाद या अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए:
- Site Inspector
- Assistant/Deputy Engineer
- Town Planning Head
- Municipal Commissioner
Collective Silence = Collective Liability
- वसई–विरार की जनता के प्रश्न : नगरपालिका़(VVCMC) से जवाबदेही की माँग
- आरक्षित भूमि पर निर्माण शुरू होने से पहले कितने निरीक्षण हुए—और वे क्यों विफल रहे?
- रिहायशी सोसायटियों में स्थायी शेड/ब्लॉकेज पर कितनी नोटिसें और कितनी कार्रवाई हुई?
- फायर सेफ़्टी और OC उल्लंघनों के लिए मापनीय प्रवर्तन तंत्र क्या है?
- आरोपित अधिकारियों–बिल्डरों के गठजोड़ पर आंतरिक जाँच और दंड कब हुआ?
- प्लानिंग अप्रूवल में डिजिटल ट्रेसबिलिटी और पारदर्शिता कब पूर्णतः लागू होगी?
- GIS/Remote Monitoring, थर्ड-पार्टी ऑडिट और नागरिक ओवरसाइट कमेटी को संस्थागत कब किया जाएगा?
वसई–विरार महानगरपालिका की कहानी बताती है कि कानून का होना पर्याप्त नहीं; उसका निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध अमल ही शहर को बचाता है।
यदि Notice-Raj और Court-Order-Delay को आज नहीं रोका गया, तो कल फिर अवैध इमारतें खड़ी होंगी और फिर किसी आदेश पर किसी का घर गिरेगा।
यह चुनाव तय करेगा:
वसई–विरार नियमों से चलेगा—या सौदों से।
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