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नालासोपारा मर्डर केस: साझेदारी से शुरू, हत्या पर खत्म!

नालासोपारा मर्डर केस में दोस्त द्वारा हिस्सेदारी विवाद में हत्या
70% हिस्सेदारी विवाद में हुई सनसनीखेज हत्या का मामला

वसई-विरार (पेल्हार) | 30 मार्च 2026: मुंबई-अहमदाबाद हाईवे के किनारे पेल्हार क्षेत्र की झाड़ियों में पड़ी एक लाल कपड़े की बोरी ने सोमवार सुबह पूरे इलाके को दहला दिया। जब स्थानीय लोगों ने बोरी खोलकर देखा, तो अंदर एक व्यक्ति का सिर कटा हुआ शव पड़ा था, जिस पर कई बार धारदार हथियार से वार किए गए थे। इस खौफनाक मंजर ने इलाके में सनसनी फैला दी। सूचना मिलते ही पेल्हार पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की—लेकिन यह सिर्फ एक अज्ञात शव नहीं था, बल्कि एक ऐसी कहानी की शुरुआत थी, जिसमें दोस्ती, भरोसा, लालच और साजिश सब कुछ शामिल था।

जांच आगे बढ़ी तो मृतक की पहचान अशोक सिंह कंवर सिंह राजपूत (32) के रूप में हुई, जो मुंबई के अंधेरी इलाके में एक किराना दुकान पर काम करता था। लंबे समय से वह अपनी खुद की दुकान खोलने का सपना देख रहा था, लेकिन अंधेरी जैसे महंगे इलाके में यह संभव नहीं था। इसी वजह से उसने वसई-विरार के नालासोपारा क्षेत्र का रुख किया, जहां कम बजट में कारोबार शुरू किया जा सकता था। यहीं उसकी मुलाकात दिनेश प्रजापति से हुई, जो खुद भी एक असफल दुकान के बाद नए सिरे से व्यापार शुरू करने की कोशिश में था।

दोनों की जरूरतें एक जैसी थीं, इसलिए उन्होंने साझेदारी में दुकान खोलने का फैसला किया। नालासोपारा पूर्व के झाबर पाड़ा में एक दुकान किराए पर ली गई और करीब 10 लाख रुपये का निवेश किया गया—जिसमें 7 लाख रुपये अशोक सिंह और 3 लाख रुपये दिनेश प्रजापति ने लगाए। 8 मार्च को दुकान की शुरुआत हुई और दोनों को उम्मीद थी कि अब उनकी किस्मत बदल जाएगी। लेकिन यही साझेदारी कुछ ही दिनों में विवाद की वजह बन गई।

दुकान शुरू होते ही हिस्सेदारी को लेकर टकराव शुरू हो गया। अशोक सिंह अपने निवेश के आधार पर 70 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहता था, जबकि दिनेश बराबर-बराबर हिस्सेदारी पर अड़ा था। बातचीत कई बार हुई, लेकिन हर बार मामला और बिगड़ता गया। इसी बीच दिनेश ने अपने दोस्त संदीप को इस विवाद में शामिल किया। संदीप के आने के बाद मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया, और धीरे-धीरे यह मतभेद एक खतरनाक साजिश में बदल गया।

पुलिस जांच के अनुसार, 29 मार्च की रात तीनों दुकान में ही मौजूद थे। रोज की तरह खाना खाने के बाद अशोक सिंह निश्चिंत होकर सो गया। उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिन लोगों के साथ वह अपना भविष्य बना रहा था, वही उसकी जिंदगी खत्म करने की योजना बना चुके हैं। देर रात, जब वह गहरी नींद में था, तभी आरोपियों ने तेज धारदार चाकू से उसका गला रेतकर हत्या कर दी। हत्या के बाद पहचान छिपाने के लिए शव का सिर धड़ से अलग कर दिया गया। धड़ को पेल्हार क्षेत्र की झाड़ियों में फेंक दिया गया, जबकि सिर और मोबाइल फोन को खाड़ी में फेंक दिया गया, ताकि कोई सबूत न बचे।

हालांकि आरोपियों को लगा कि उन्होंने सबूत मिटा दिए हैं, लेकिन पुलिस की जांच ने पूरी कहानी सामने ला दी। घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं, जिसमें दो लोग बोरी ले जाते हुए दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने झाबर पाड़ा स्थित दुकान की तलाशी ली, जहां से हत्या से जुड़े अहम सबूत मिले। तकनीकी और गोपनीय जानकारी के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया।

शव की पहचान करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन मृतक के हाथ पर बने “अशोक सिंह राजपूत” नाम के टैटू ने अहम सुराग दिया। पुलिस की अपील पर Metro City Samachar ने इस जानकारी को प्रमुखता से प्रसारित किया, जिससे यह खबर मृतक के परिजनों तक पहुंची। अहमदाबाद में रहने वाले उसके भाई ने यह खबर देखी और तुरंत नालासोपारा पहुंचकर पहचान की पुष्टि की।

इसी दौरान पुलिस ने ड्रोन सर्च ऑपरेशन चलाकर खाड़ी से मृतक का सिर, मोबाइल फोन और अन्य सबूत बरामद कर लिए। महज 8 घंटे के भीतर इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा कर दिया गया, जो पुलिस की तेज और सटीक जांच का परिणाम है। आरोपियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

यह पूरा मामला एक कड़वी सच्चाई को सामने लाता है—कि व्यापारिक साझेदारी में जब भरोसा टूटता है और लालच हावी हो जाता है, तो नतीजा सिर्फ विवाद नहीं, बल्कि विनाश भी हो सकता है। कुछ लाख रुपये और हिस्सेदारी के टकराव ने एक दोस्त को हत्यारा बना दिया और एक जिंदगी हमेशा के लिए खत्म हो गई।

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