नालासोपारा की इस खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शिरसाड-वज्रेश्वरी (Virar) मार्ग के पास रमेश घरत के खेत में जामुन के पेड़ के नीचे जब एक महिला का खून से लथपथ शव मिला, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि इसके पीछे इतनी सुनियोजित और निर्मम साजिश छिपी है। मांडवी पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन सड़ी-गली हालत में मिले शव ने पहचान तक मुश्किल बना दी। शुरुआत में मामला उलझा हुआ था—न कोई साफ सुराग, न कोई गवाह… मानो यह एक “ब्लाइंड मर्डर” हो।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मीरा-भाईंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय की क्राइम ब्रांच यूनिट-3 को सौंपी गई। टीम ने हार नहीं मानी—72 घंटों तक लगातार 500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, हर छोटी-बड़ी कड़ी को जोड़ा गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, शक की दिशा एक ऐसे शख्स की ओर मुड़ने लगी, जो सबसे करीब था… पति।
28 मार्च को पुलिस ने रोशन रामजग यादव और उसके साथी भानुप्रताप विजय बहादुर यादव को हिरासत में लिया। पूछताछ शुरू हुई और धीरे-धीरे सच सामने आने लगा। जिस महिला की पहचान नहीं हो पा रही थी, वह कोई और नहीं बल्कि रोशन की अपनी पत्नी—मधुबाला उर्फ प्रियाकुमारी यादव थी।
जांच में जो कहानी सामने आई, वह और भी सिहराने वाली थी। रोशन को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था—और यही शक उसके दिमाग में जहर बनकर फैलता गया। उसने पहले ही हत्या की पूरी योजना बना ली थी। 15 मार्च को वह पत्नी को उत्तर प्रदेश से नालासोपारा लेकर आया। बाहर से सब सामान्य दिख रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर एक खतरनाक साजिश तैयार हो रही थी।
19 मार्च का दिन… जब रोशन ने अपने दोस्त भानुप्रताप के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। वह अपनी पत्नी को बाइक पर बैठाकर सुनसान जगह ले गया। वहां पहले चाकू से उसकी गर्दन पर वार किया गया… और जब वह तड़प रही थी, तब पत्थर से उसका सिर कुचलकर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद शव को खेत में फेंक दिया गया, ताकि कोई पहचान न सके और मामला हमेशा के लिए दफन हो जाए।
लेकिन कहते हैं ना—अपराध कितना भी चालाकी से क्यों न किया जाए, सच ज्यादा दिन छिप नहीं सकता। पुलिस ने 72 घंटे के भीतर इस पूरे मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश कर दिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
इस ऑपरेशन को पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, अतिरिक्त आयुक्त दत्तात्रय शिंदे, डीसीपी संदीप डोईफोडे और एसीपी मदन बल्लाळ के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।
नालासोपारा की यह कहानी सिर्फ एक हत्या नहीं है… यह उस शक की कहानी है, जो इंसान को इतना अंधा बना देता है कि वह अपने ही रिश्ते का खून कर देता है। 72 घंटे की इस जांच ने साबित कर दिया—कानून की नजर से कोई नहीं बच सकता।
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