Home ताजा खबरें FDA Actions : खबरों की खबर भाग–2 | आपकी थाली में आखिर क्या है? खाद्य सुरक्षा की देशव्यापी पड़ताल
ताजा खबरेंदेशमहाराष्ट्रमुख्य समाचारराज्य

FDA Actions : खबरों की खबर भाग–2 | आपकी थाली में आखिर क्या है? खाद्य सुरक्षा की देशव्यापी पड़ताल

FDA Actions : खबरों की खबर भाग–2
FDA Actions : खबरों की खबर भाग–2

[Metro City Samachar की विशेष खोजपरक श्रृंखला]

भाग-1:पिछले भाग में सामने आए अहम तथ्य

भाग–1 में हमने देखा कि महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई मिठाई-मावा से शुरू होकर दूध, डेयरी उत्पादों, होटल, रेस्तरां और बेकरी तक पहुंची। मुंबई, नागपुर और वसई में कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई और स्वच्छता, भंडारण, कीट नियंत्रण तथा खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर कमियां सामने आईं।

लेकिन सवाल सिर्फ “खाने में क्या है?” तक सीमित नहीं रहा। जांच धीरे-धीरे पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला और FDA की कार्रवाई की प्रक्रिया तक पहुंचने लगी।

अब सवाल था- क्या निजी, सरकारी और प्रतिष्ठित सभी संस्थानों पर खाद्य सुरक्षा के नियम समान रूप से लागू हो रहे हैं?

इसी सवाल से शुरू होती है खबरों की खबर – भाग – 2। Poornima से Bombay High Court और सरकारी कैंटीन तक: FDA की कार्रवाई पर उठे निष्पक्षता और समान नियमों के सवाल

खाद्य सुरक्षा पर हमारी विशेष श्रृंखला के पहले भाग में हमने देखा कि महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई मिठाई-मावा, दूध और डेयरी उत्पादों से आगे बढ़कर होटल, रेस्तरां और बेकरी तक पहुंची।

लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह में इस अभियान ने एक नया मोड़ लिया। अब सवाल केवल यह नहीं था कि-

किस रसोई में गंदगी मिली? सवाल यह भी उठने लगा कि-

क्या खाद्य सुरक्षा के नियम निजी और सरकारी – सभी प्रतिष्ठानों पर समान रूप से लागू किए जा रहे हैं? इस बहस के केंद्र में आया मुंबई के फोर्ट इलाके का छह दशक से अधिक पुराना Poornima Restaurant।

Poornima Restaurant: 23 जुलाई का निरीक्षण

महाराष्ट्र FDA ने 23 जुलाई को दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में स्थित Poornima Restaurant का निरीक्षण किया। यह दशकों पुराना उडुपी रेस्तरां है और Bombay Stock Exchange, Bombay House तथा Bombay High Court के आसपास के कार्यालयी इलाके में जाना-पहचाना नाम है।

FDA के अनुसार निरीक्षण में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से संबंधित कई कमियां मिलीं। सबसे ज्यादा चर्चा भंडारण में रखी सब्जियों और दूसरे कच्चे खाद्य पदार्थों पर फफूंद मिलने की हुई। रिपोर्टों के मुताबिक सांभर में इस्तेमाल होने वाली सहजन की फलियों और रेस्तरां के एक व्यंजन में इस्तेमाल होने वाले केले तक पर फफूंद मिलने की बात FDA ने कही।

इसके अलावा खाद्य पदार्थों के भंडारण, रसोई की स्वच्छता और अलग-अलग खाद्य सामग्रियों के आपस में दूषित होने के खतरे से जुड़ी कमियां भी बताई गईं। इसके बाद रेस्तरां का FSSAI खाद्य व्यवसाय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और कारोबार रोकने की कार्रवाई हुई।

लेकिन Poornima ने FDA की कार्रवाई को चुनौती दे दी

कहानी यहीं समाप्त नहीं हुई। Poornima Restaurant ने Bombay High Court का दरवाजा खटखटाया। रेस्तरां प्रबंधन ने FDA की कार्रवाई को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। प्रबंधन की मुख्य आपत्ति यह थी कि प्रतिष्ठान को सीधे बंद करने और लाइसेंस निलंबित करने से पहले आवश्यक सुधार नोटिस (Improvement Notice) जारी नहीं किया गया।

यहीं से मामला केवल –

“रसोई में क्या मिला?” तक सीमित नहीं रहा।

अब दूसरा सवाल खड़ा हो गया – “कमियां मिलने के बाद कार्रवाई किस प्रक्रिया से की गई?” खाद्य सुरक्षा जरूरी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया भी उतनी ही जरूरी

इस पूरे विवाद को समझने के लिए दो बातों को अलग रखना होगा। पहली – FDA को निरीक्षण में क्या कमियां मिलीं?

दूसरी – उन कमियों के आधार पर FDA ने क्या कार्रवाई की और क्या उसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया?

किसी प्रतिष्ठान में खाद्य सुरक्षा संबंधी कमी मिलना एक मुद्दा है। लेकिन सुधार नोटिस देना, सुनवाई का अवसर देना, लाइसेंस निलंबित करना, तत्काल कारोबार रोकना, और बाद में दोबारा निरीक्षण करना – नियामक प्रक्रिया के अलग-अलग चरण हो सकते हैं।

Bombay High Court ने पूछा – कहीं किसी को बंद और किसी को केवल नोटिस क्यों?

मामले की सुनवाई के दौरान Bombay High Court ने FDA की कार्रवाई में समानता और निष्पक्षता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ प्रतिष्ठानों को सीधे बंद करने की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कुछ को केवल सुधार नोटिस दिया जा रहा है।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक कार्रवाई सभी के लिए निष्पक्ष और समान मानदंडों पर आधारित होनी चाहिए। यह टिप्पणी पूरे FDA अभियान के लिए महत्वपूर्ण थी। क्योंकि खाद्य सुरक्षा के नाम पर सख्ती आवश्यक है लेकिन – समान गलती पर समान प्रक्रिया भी उतनी ही आवश्यक है।

Poornima के Suspension को सुधार नोटिस मानने का निर्देश

मामले में आगे Bombay High Court ने Poornima Restaurant के खिलाफ जारी निलंबन आदेश को फिलहाल सुधार नोटिस (Improvement Notice) की तरह मानने का निर्देश दिया। प्रतिष्ठान को कमियां सुधारने का अवसर दिया गया और उसके बाद दोबारा निरीक्षण की व्यवस्था की गई। यह आदेश एक महत्वपूर्ण संतुलन स्थापित करता दिखाई दिया। एक तरफ खाद्य सुरक्षा की कमियों को नजरअंदाज नहीं किया गया। दूसरी तरफ प्रतिष्ठान को सुधार का अवसर देने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया।

यही सवाल दूध विक्रेताओं के मामलों में भी उठा

यह विवाद केवल Poornima तक सीमित नहीं रहा। Bombay High Court की Aurangabad Bench ने कुछ दूध विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के लाइसेंस निलंबन के मामलों में भी हस्तक्षेप किया। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं थी जिसमें तत्काल कठोर कार्रवाई जरूरी हो, तो सुधार नोटिस अथवा सुनवाई का अवसर दिए बिना सीधे लाइसेंस निलंबित करने जैसा कदम क्यों उठाया गया।

यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। क्योंकि इससे खाद्य सुरक्षा अभियान में एक नया सिद्धांत सामने आता है –

सख्त कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।

सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना भी उतना ही जरूरी है।

फिर अदालत ने बड़ा सवाल पूछा – केवल निजी प्रतिष्ठान ही क्यों?

FDA की कार्रवाई पर सुनवाई के दौरान Bombay High Court ने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। क्या राज्यव्यापी खाद्य सुरक्षा अभियान में केवल निजी होटल और रेस्तरां की जांच हो रही है? या—

सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, वैधानिक संस्थाओं और सरकारी परिसरों में चलने वाली कैंटीनों की भी जांच की जा रही है? अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में जानकारी मांगी। यहीं से FDA अभियान का दायरा एक नए क्षेत्र में पहुंच गया।

BMC मुख्यालय की कैंटीन: 31 कमियां

दरअसल इससे पहले ही Brihanmumbai Municipal Corporation यानी BMC मुख्यालय की कैंटीन FDA कार्रवाई के दायरे में आ चुकी थी। BMC मुख्यालय के Annexe Building में चलने वाली कैंटीन का संचालन Kamal Caterers Pvt Ltd द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई। FDA ने पहले किए गए निरीक्षण में यहां—31 खाद्य सुरक्षा संबंधी कमियां चिह्नित की थीं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उसी दिन अचानक बंद करने का मामला नहीं था। प्रतिष्ठान को पहले कमियां सुधारने का अवसर दिया गया था। लेकिन बाद के निरीक्षण में FDA के अनुसार सभी 31 कमियां दूर नहीं की गई थीं। इसके बाद खाद्य पंजीकरण प्रमाणपत्र निलंबित कर कैंटीन का संचालन रोक दिया गया।

इस मामले ने क्या साबित किया? 

BMC मुख्यालय की कैंटीन पर कार्रवाई का संदेश बेहद स्पष्ट था—सरकारी परिसर में भोजन बेचने वाला प्रतिष्ठान खाद्य सुरक्षा नियमों से बाहर नहीं है।

अगर किसी निजी रेस्तरां से—

स्वच्छ रसोई, कीट नियंत्रण, सुरक्षित भंडारण, कर्मचारियों की स्वच्छता, और आवश्यक दस्तावेज की अपेक्षा की जाती है तो वही नियम सरकारी कार्यालय की कैंटीन पर भी लागू होने चाहिए।

फिर Bombay High Court की अपनी कैंटीनों तक पहुंची FDA टीम

अदालत में सरकारी और अर्द्ध-सरकारी कैंटीनों की जांच का सवाल उठने के बाद FDA की टीम Bombay High Court परिसर की कैंटीनों तक पहुंची। अदालत परिसर की तीन कैंटीनों का निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें से एक कैंटीन के आवश्यक खाद्य पंजीकरण/लाइसेंस के बिना संचालित होने को लेकर सवाल सामने आया और FDA ने कारोबार रोकने का आदेश जारी किया।

बाद में आवश्यक पंजीकरण प्राप्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई। इस घटनाक्रम का प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा था। जिस अदालत में यह सवाल उठ रहा था कि “क्या केवल निजी प्रतिष्ठानों की जांच हो रही है?” उसी अदालत परिसर की खाद्य सुविधाएं भी जांच के दायरे में आ गईं।

Mantralaya और दूसरे सरकारी प्रतिष्ठानों पर भी सवाल

Bombay High Court ने राज्य सरकार से यह भी जानना चाहा कि FDA का मौजूदा अभियान –

सरकारी विभागों, अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं, वैधानिक निकायों, और उनके द्वारा प्रत्यक्ष अथवा ठेके पर संचालित भोजनालयों तक किस स्तर पर पहुंचा है। Mantralaya की कैंटीन सहित सरकारी भोजनालयों की जांच का प्रश्न भी सामने आया। अदालत ने राज्यव्यापी स्तर पर ऐसे निरीक्षणों का विवरण मांगा। यह पूरे अभियान के लिए महत्वपूर्ण मोड़ था।

अब खाद्य सुरक्षा की बहस – “कौन-सा रेस्तरां पकड़ा गया?”

से आगे बढ़कर—

“क्या कानून सब पर समान रूप से लागू हो रहा है?” तक पहुंच चुकी थी।

इसी बीच मुंबई के प्रतिष्ठित क्लबों पर बड़ी कार्रवाई

दूसरी ओर FDA की कार्रवाई मुंबई के उन प्रतिष्ठित क्लबों तक भी पहुंची जहां सदस्यता और प्रतिष्ठा को अक्सर उच्च स्तर की सेवा और गुणवत्ता से जोड़कर देखा जाता है।

कार्रवाई के दायरे में आए – Cricket Club of India (CCI), Willingdon Sports Club, MIG Cricket Club, RK Juhu Gymkhana और

Aparna Juhu Gymkhana। इन पांच प्रतिष्ठानों में खाद्य कारोबार से जुड़े लाइसेंस निलंबित किए गए। इसके अलावा Goregaon Sports Club में संचालित एक रेस्तरां को कारोबार रोकने का नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई।

CCI की रसोई में क्या मिला?

Cricket Club of India से संबंधित FDA निरीक्षण की खबरों ने विशेष रूप से ध्यान खींचा। FDA के अनुसार वहां— जीवित तिलचट्टे, मक्खियां,फफूंद लगी सब्जियां,

जरूरत से ज्यादा पक चुके अथवा खराब होने की स्थिति वाले मशरूम, समय-सीमा पार कर चुके खाद्य पदार्थ, रसोई की सतहों पर सफाई के उपकरण,फर्श पर बर्तनों की सफाई अथवा रख-रखाव,और भंडारण तथा संरचनात्मक स्वच्छता से जुड़ी कमियां मिलीं।

क्लब की ओर से कुछ निष्कर्षों की गंभीरता पर असहमति भी जताई गई। यानी यहां भी FDA का पक्ष और प्रतिष्ठान का पक्ष दोनों दर्ज करना जरूरी है।

प्रतिष्ठित क्लबों की कार्रवाई से टूटा एक और भ्रम

महंगी सदस्यता। प्रतिष्ठित पता। दशकों पुराना नाम। प्रभावशाली सदस्य।

इनमें से कोई भी अपने आप यह प्रमाणित नहीं करता कि रसोई खाद्य सुरक्षा के सभी मानकों पर खरी उतरती है।

इसलिए साफ भोजन कक्ष और सुरक्षित रसोई एक ही बात नहीं हैं। ग्राहक को सामने का हिस्सा दिखाई देता है। FDA को पीछे का हिस्सा देखना होता है।

अब खाद्य सुरक्षा की बहस तीन स्तरों पर पहुंच चुकी थी

जुलाई के अंतिम सप्ताह तक महाराष्ट्र FDA अभियान को तीन अलग-अलग स्तरों पर देखा जा सकता था।

पहला—खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता

दूध, पनीर, मिठाई, डेयरी उत्पाद और दूसरे खाद्य पदार्थ मानकों पर खरे हैं या नहीं?

दूसरा—रसोई और प्रतिष्ठान की स्वच्छता

कीट नियंत्रण, भंडारण, तापमान, कचरा प्रबंधन और कर्मचारियों की स्वच्छता कैसी है?

तीसरा—नियामक कार्रवाई की निष्पक्षता

क्या निजी और सरकारी प्रतिष्ठानों पर समान नियम लागू हो रहे हैं? क्या सुधार नोटिस, निलंबन और कारोबार रोकने के लिए स्पष्ट तथा समान मानदंड हैं? यही तीसरा प्रश्न Poornima और Bombay High Court की सुनवाई के बाद विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया।

और तभी जांच रेस्तरां से निकलकर दूध के टैंकर और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंची

अब कहानी का अगला हिस्सा और भी महत्वपूर्ण था। क्योंकि FDA की कार्रवाई केवल तैयार भोजन और रसोई तक सीमित नहीं रहने वाली थी। जांच पहुंचने वाली थी—

दूध के टैंकर तक, दूध संग्रह केंद्र तक, पनीर आपूर्तिकर्ता तक, कुल्फी निर्माण इकाई तक, खाद्य तेल तक, और खाद्य पूरक उत्पादों तक।

यानी सवाल अब था – अगर रेस्तरां में खराब पनीर मिला तो क्या केवल रेस्तरां जिम्मेदार है, या उस पनीर को बनाने और वहां तक पहुंचाने वाली पूरी श्रृंखला की जांच होनी चाहिए?

यही सवाल हमें महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा अभियान की सबसे महत्वपूर्ण परत तक ले जाता है—

स्रोत से थाली तक की पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला।

एक जरूरी तथ्यात्मक नोट

इस श्रृंखला में FDA द्वारा बताई गई निरीक्षण संबंधी कमियों को संबंधित प्रतिष्ठान की अंतिम कानूनी दोषसिद्धि नहीं माना गया है। किसी प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित होना, उसे सुधार नोटिस मिलना, कारोबार रोकने का आदेश जारी होना और अदालत में अंतिम दोष सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी तथा नियामक चरण हैं।

जहां संबंधित प्रतिष्ठान अथवा संगठन ने FDA के निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है, वहां उसका पक्ष भी महत्वपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा के मामले में उपभोक्ता की सुरक्षा सर्वोपरि है लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई में समानता, पारदर्शिता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया भी उतनी ही जरूरी है।

—

अगले भाग में पढ़ें:
खबरों की खबर | भाग–3
रेस्तरां से डेयरी सप्लाई चेन तक पहुंची FDA की जांच—दूध, पनीर, टैंकर और एनालॉग उत्पादों ने खड़े किए नए सवाल।

अगर नमूना फेल हुआ, तो जिम्मेदारी दुकानदार की या मूल निर्माता की?

ये भी पढ़ें:
Bombay High court : बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश भी बेअसर! किसके संरक्षण में खड़े हैं अवैध निर्माण?

 

Related Articles

पालघर में भूकंप के झटके महाराष्ट्र भूकंप की खबर
ताजा खबरेंदेशपालघर - Palghar Newsमुंबई - Mumbai News

पालघर में भूकंप की खबर, NCS के अपडेट का इंतजार

पालघर, 26 सितंबर। महाराष्ट्र के पालघर जिले में भूकंप के झटके महसूस...

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि यदि भारत विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक और नवाचार को व्यापक रूप से अपनाता है, तो देश वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' बनने की दिशा में 10 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर भी हासिल कर सकता है
ताजा खबरेंदेश

तकनीक और नवाचार के दम पर भारत 10% से अधिक विकास दर हासिल कर सकता है: निर्मला सीतारमण

चेन्नई, 26 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है...

Share to...