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महंगाई पर काबू पाने में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह से विफलः पंकज द्विवेदी, लोकदल ने महंगाई के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा

ज्ञानपुर। महगाई, डीजल, पैट्रोल, घरेलू गैस, खाद्य पदार्थो की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग से संबंधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में लोकदल के जिलाध्यक्ष पंकज कुमार द्विवेदी ने आम जनता को महंगाई की मार से मुक्ति दिलाने की मांग उठाई है। लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चैधरी सुनील सिंह के आह्वान पर आज लोकदल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया गया और अनियंत्रित बढ़ती महंगाई को लेकर तीन सुत्रीय ज्ञापन सौपा गया। जिलाध्यक्ष पंकज कुमार ने कहा कि आम जनता महंगाई के बोझ तले दबी जा रही है। किसानों की समस्याओं का कोई पुरसाहाल नहीं है।

केंद्र और राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण ईंधन के दामों में भी तेजी आई है। आम जनता अनियंत्रित महंगाई से हताश और परेशान है। जिलाध्यक्ष श्री द्विवेदी ने कहा कि डीजल, पेट्रोल, घरेलू गैस और खाद्य पदार्थो पर नियंत्रण कर पाने में केंद्र सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है। खाद्यान्न की कीमतों में भी भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था किसानों की वजह से चलती है, न कि कारपोरेट घरानों की वजह से। इसलिए केंद्र सरकार उद्योगपतियों के हितों के साथ-साथ आम जनता और किसानों की परेशानीको समझे और राहत पहुंचाने के लिए आगे आए। उन्होंने बढ़ती महंगाई और कोविड के दौर में आम जनता को राहत पहुंचाने के लिये गरीब, मजदूर, किसान तबके के परिवार को 10000 रुपये प्रति माह प्रति परिवार को उपलब्ध कराए जाने की भी मांग की है। कहा कि आम आदमी के जीवन के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी खाद्यय सामानों के दाम भी आसमान छू रहे है।

ऐसी स्थिति में समाज का गरीब और कमजोर वर्ग अपना तथा अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करें, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ। कहा कि व्यवस्थाओं पर नियंत्रण और उसके सही संचालन की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होती है, जिसे वह पूरा करने में नाकाम है। जनता के बीच केवल झूठे प्रलोभन और वादे करके कुछ पल के लिए हमदर्दी मिल सकती है, लेकिन जनता की समस्याओं का स्थाई समाधान इससे होने वाला नहीं है। आज लोकतंत्र में रोटी कपड़ा और मकान के संसाधन को बनाना सरकार की अहम जिम्मेदारी है। जब तक इस पर सरकार ध्यान न हीं देगी तब तक आम जनता जो भूखे पेट सोने का विवश है, न तो उसके जीवन में खुशहाली आ सकती है और न ही वह आत्म निर्भर हो पायेगा। मांग किया कि पेट्रो पदार्थो की बढ़ती किमतों तथा खाद्यय पदार्थो के दामों में भारी उछाल पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया जाय।

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