पालघर। 11 मार्च: गर्मियों में बढ़ते तापमान के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। डहाणू वन विभाग ने कीमती जंगल संपदा, वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा के लिए नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।
पालघर जिले के डहाणू, पालघर, तलासरी और वसई तहसीलों में फैले डहाणू वन विभाग का कुल वन क्षेत्र 918.66 वर्ग किमी है। पश्चिम में अरब सागर और अन्य तीनों तरफ पहाड़ियों से घिरा यह क्षेत्र गुजरात, दादरा-नगर हवेली, जव्हार, ठाणे वन विभागों से घिरा है। यहां 12 वन रेंज, 58 सर्कल और 165 बीट सक्रिय हैं।
बढ़ती गर्मी और शुष्क मौसम के कारण जंगलों में प्राकृतिक या मानवीय लापरवाही से आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। डहाणू वन विभाग में 25,582 व्यक्तिगत वन अधिकार दावे मंजूर हैं, जहां 15,740 हेक्टेयर पर खेती होती है। खेतों में पराली जलाने से जंगल तक आग फैलने का खतरा अधिक है।
रोकथाम के व्यापक उपाय
वन विभाग ने आग रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं:
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जनजागृति: ग्रामीणों, पर्यटकों के बीच जागरूकता अभियान।
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फायर लाइन: 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक जंगल की सीमाओं पर फायर लाइन बनाई जाती है।
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फायर वॉचर्स: 135 फायर वॉचर्स तैनात, फायर ब्लोअर (57), बीटर (33), रैक (4) और फायरप्रूफ कपड़े उपलब्ध।
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अलर्ट सिस्टम: फॉरेस्ट सर्व्हे ऑफ इंडिया (FSI) अलर्ट पर तुरंत कार्रवाई।
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रात्रि गश्त: दिन-रात गश्त जारी।
2024-25 में 180 आग की घटनाओं से 386.565 हेक्टर प्रभावित, 2025-26 (फरवरी तक) में 42 घटनाएं और 70.779 हेक्टर। इस साल नियंत्रण बेहतर।
आग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई
भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26/33 और महाराष्ट्र वन नियमावली 2014 के तहत जंगल में जानबूझकर आग लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई।
नागरिकों से अपील:
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जंगल में सिगरेट, तंबाकू, जलती चीजें न फेंकें।
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आग दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें।
टोल-फ्री: 1926 | वन कंट्रोल रूम: 7018452100 - पालघर जिले में गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं, प्रशासन ने अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है।