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मुंबई लोकल हत्याकांड में नया मोड़: आरोपी बोला- ‘पहले मुझ पर हुआ हमला’, कोर्ट में बचाव पक्ष के दावों से मचा हड़कंप

मुंबई लोकल हत्याकांड में आरोपी रोशन सुवर्णा और मृतक मयंक लोहार
मयंक लोहार हत्याकांड में कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई अहम दावे किए।

6 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया आरोपी रोशन सुवर्णा, हथियार और हत्या के मकसद की तलाश जारी

मुंबई | 26 जून 2026 | Metro City Samachar : मुंबई लोकल ट्रेन में हुए चर्चित मयंक लोहार हत्याकांड की जांच के बीच गुरुवार को बोरीवली कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले दावे सामने आए। आरोपी रोशन सुवर्णा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अमित मिश्रा ने अदालत में दावा किया कि यह घटना किसी पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा नहीं थी और मृतक मयंक लोहार तथा आरोपी एक-दूसरे को पहले से जानते तक नहीं थे।

मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे पुलिस ने आरोपी की 7 दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की थी। हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी रोशन सुवर्णा को 6 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।

कोर्ट में बचाव पक्ष का बड़ा दावा

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में सबसे पहले विवाद शुरू हुआ था। अधिवक्ता अमित मिश्रा के अनुसार, बहस के दौरान मृतक मयंक लोहार ने आरोपी के साथ मारपीट की थी, जिससे उसका चश्मा गिर गया और चेहरे पर चोट भी लगी।

बचाव पक्ष का कहना है कि घटना के दौरान डिब्बे में अफरा-तफरी का माहौल था और आरोपी ने कथित तौर पर आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी। वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी पहले से मानसिक तनाव में था और अतीत में उसके साथ हुई किसी अप्रिय घटना के कारण वह भय के माहौल में जी रहा था।

हालांकि बचाव पक्ष द्वारा किए गए इन दावों की अभी तक पुलिस या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

शराब के प्रभाव में होने का भी दावा

कोर्ट परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए अधिवक्ता अमित मिश्रा ने दावा किया कि घटना के समय आरोपी शराब के प्रभाव में था और उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी।

बचाव पक्ष के अनुसार, नशे और अचानक बने तनावपूर्ण माहौल के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

बचाव पक्ष ने रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति धारदार हथियार लेकर लोकल ट्रेन में यात्रा कर सकता है, तो यह रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

पुलिस किन बिंदुओं पर कर रही है जांच?

दूसरी ओर रेलवे पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। जांच अधिकारी हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी, आरोपी और मृतक के बीच किसी संभावित पुराने संबंध, घटना के वास्तविक कारण और आरोपी के ट्रेन में हथियार लेकर पहुंचने की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है और जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है।

क्या है पूरा मामला?

23 जून 2026 की रात चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में भारी बारिश के दौरान दरवाजा बंद करने को लेकर विवाद हुआ था। इसी विवाद के दौरान 22 वर्षीय मयंक लोहार पर धारदार हथियार से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल मयंक को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इसके बाद रेलवे पुलिस ने 400 से अधिक CCTV कैमरों की जांच कर आरोपी रोशन सुवर्णा को गिरफ्तार किया था।

जांच जारी

फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और पुलिस हत्या के मकसद, हथियार की बरामदगी और घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

नोट: इस रिपोर्ट में बचाव पक्ष द्वारा अदालत और मीडिया के समक्ष किए गए दावों को उनके कथन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन दावों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

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