मुंबई: मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े ₹500 करोड़ के कथित लेनदेन वाले ऑडियो विवाद में अब विशेष जांच दल यानी SIT पड़ताल करेगा। मुंबई पुलिस ने सोमवार, 26 अक्टूबर को टीम गठित की है। जांच का केंद्र वायरल बातचीत में किए गए दावों की सच्चाई, रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें सुनाई देने वाली आवाजें होंगी। अभी किसी रकम का लेनदेन साबित नहीं हुआ है।
कौन करेगा जांच और क्या होगी जिम्मेदारी?
टीम की अगुवाई मुंबई के दक्षिण प्रादेशिक विभाग के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेश बलकवडे करेंगे। पुलिस उपायुक्त विजयकांत सागर और अपराध शाखा की साइबर इकाई के पुलिस उपायुक्त बजरंग बनसोडे इसके सदस्य हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय ने जांच की व्यवस्था की है।
SIT को ऑडियो की फॉरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी पड़ताल करनी है। रिकॉर्डिंग कहां से आई, बातचीत में कौन लोग हैं और उसमें जिन रकमों व व्यक्तियों का उल्लेख है उनका संदर्भ क्या है—इन पहलुओं को परखा जाएगा। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त अधिकारियों को जोड़ने और जांच की प्रगति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने की व्यवस्था भी बताई गई है।
दावा क्या है, और संबंधित पक्ष क्या कह रहे हैं?
विवाद उस ऑडियो से जुड़ा है जिसे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील ने सार्वजनिक किया था। कथित बातचीत में आरक्षण आंदोलन को प्रभावित करने के लिए बड़ी रकम पहुंचाने की बात कही गई। जरांगे ने पैसा लेने से इनकार करते हुए इसे उन्हें और मराठा समाज को बदनाम करने की साजिश बताया है। उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की है और सहयोग की बात कही है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी उनके जरिए रकम पहुंचाने के दावों को खारिज किया है। इसलिए ऑडियो में किसी का नाम आ जाने को लेनदेन का प्रमाण या दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। संबंधित पक्षों के इनकार और जांच की मौजूदा स्थिति को साथ रखकर ही मामले को देखना जरूरी है।
संजय राउत ने ED जांच क्यों मांगी?
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर महाराष्ट्र पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि कथित रकम के स्रोत और उसके संभावित रास्ते की पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग रखी है।
राउत की मांग राजनीतिक प्रतिक्रिया है; इसे ED की ओर से जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं समझना चाहिए। अभी सामने आया ठोस प्रशासनिक कदम मुंबई पुलिस की SIT का गठन है। ऑडियो की सत्यता या कथित रकम के भुगतान पर जांच एजेंसी का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
आगे किन बातों पर नजर रहेगी?
अब अहम होगा कि तकनीकी जांच में रिकॉर्डिंग के बारे में क्या निकलता है, आवाजों की पहचान किस आधार पर होती है और कथित लेनदेन के समर्थन में स्वतंत्र सामग्री मिलती है या नहीं। राजनीतिक आरोपों से अलग, इन्हीं जांच-नतीजों से तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल रिपोर्टिंग का आधार जांच का आदेश और संबंधित पक्षों के बयान हैं; किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने वाला निष्कर्ष नहीं।




