पालघर: रिलीफ अस्पताल में कथित मारपीट और हंगामे से जुड़े मामले में 11 गोविंदाओं तथा एक कैमरामैन को जमानत मिली है। उपलब्ध न्यायालय संबंधी जानकारी के अनुसार, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट सुजाता बांदल ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को इन 12 लोगों की अर्जियां मंजूर कीं। मामले के कुछ अन्य प्रमुख आरोपियों की जमानत अर्जियों पर निर्णय अभी बाकी बताया गया है।
जमानत आदेश से क्या बदला
यह राहत उन 12 लोगों की अर्जियों से संबंधित है, जिन पर अदालत ने मंगलवार को फैसला किया। इसे मामले के सभी आरोपियों को जमानत मिल जाना नहीं माना जा सकता। जमानत आरोपों से बरी होना भी नहीं है; मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया अलग से चलेगी। विस्तृत आदेश की शर्तें उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं हैं।
अस्पताल में विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला दहीहंडी के दौरान घायल हुए गोविंदाओं के इलाज और अस्पताल से छुट्टी से जुड़े विवाद के बाद सामने आया था। अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों से गालीगलौज, धमकी तथा मारपीट के आरोप लगे थे। पालघर पुलिस में सितंबर में मामला दर्ज होने के बाद कुल 23 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी।
इनमें गोविंदा पथक से जुड़े लोग और राजनीतिक पदाधिकारी भी शामिल थे। आरोपों की भूमिका अलग-अलग होने के कारण अदालत में अर्जियां और पक्षों के तर्क भी अलग-अलग चरणों में सुने गए हैं। वर्तमान जमानत अपडेट में किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से सिद्ध बताना उचित नहीं होगा।
पहले भी अदालत में हुई थी सुनवाई
सितंबर में पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने और बाद में जमानत संबंधी अर्जियों पर सुनवाई हुई थी। 18 सितंबर को अदालत ने 22 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा था; एक अन्य आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में था। सितंबर के अंत में छह आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज होने की सूचना भी सामने आई थी।
27 अक्टूबर का नया घटनाक्रम 12 अन्य जमानत अर्जियों की मंजूरी है। इसलिए पुराने आदेश और नए फैसले को मिलाकर सभी लोगों की वर्तमान स्थिति का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। जिन अर्जियों पर निर्णय बाकी है, उनके अगले आदेश से ही आगे की स्थिति साफ होगी।




