ठाणे: बढ़ती आबादी और नए आवासीय तथा औद्योगिक विकास के बीच ठाणे सहित मुंबई महानगर क्षेत्र में भविष्य के पानी की जरूरत का साझा अध्ययन किया जाएगा। राज्य सरकार ने 2051 तक के जलनियोजन के लिए सेवानिवृत्त जलसंपदा सचिव डॉ. संजय बेलसरे की अध्यक्षता में अध्ययन समूह बनाया है। समूह को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देनी है।
ठाणे और आसपास के शहर एक साथ अध्ययन में
समूह में ठाणे, मुंबई, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली की महानगरपालिकाओं के प्रतिनिधियों के साथ एमएमआरडीए और एमआईडीसी सहित संबंधित एजेंसियों की भागीदारी होगी। कोंकण क्षेत्र के जलसंपदा विभाग के मुख्य अभियंता सदस्य सचिव होंगे। अलग-अलग शहरों की मांग और उपलब्ध स्रोतों को एक साथ देखकर कमी का आकलन करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
2031, 2041 और 2051 की जरूरत का अनुमान
अध्ययन में घरेलू उपयोग के अलावा उद्योग, व्यापार, संस्थानों और निर्माण क्षेत्र की पानी की जरूरत का अनुमान तैयार होगा। इन अनुमानों की तुलना उपलब्ध आपूर्ति, चल रहे प्रोजेक्ट और प्रस्तावित स्रोतों से की जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस अवधि में कितनी कमी पड़ सकती है और किन कामों को प्राथमिकता देनी होगी।
सिर्फ नए धरण नहीं, दूसरे विकल्प भी
समूह से साफ किए गए इस्तेमालशुदा पानी के पुनः उपयोग, वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जलस्रोतों को फिर सक्रिय करने जैसे विकल्प देखने को कहा गया है। वितरण व्यवस्था में रिसाव, बर्बादी और पानी के नुकसान को कम करने के उपाय भी अध्ययन में शामिल होंगे।
जलवायु से जुड़े जोखिमों और बदलते वर्षा पैटर्न को ध्यान में रखकर लंबे समय का रास्ता तय किया जाएगा। अंतिम रोडमैप में जरूरी प्रोजेक्ट, संभावित खर्च, समयसीमा, धन की जरूरत और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी जैसे पहलू शामिल किए जाने हैं।
अभी अध्ययन समूह बना है, नया प्रोजेक्ट मंजूर नहीं
निवासियों के लिए इस फैसले का महत्व भविष्य की आपूर्ति के नियोजन में है। समूह बनने का मतलब किसी नई पाइपलाइन, धरण या अतिरिक्त पानी की तत्काल मंजूरी नहीं है। अध्ययन और उसके बाद लिए जाने वाले फैसलों से वास्तविक कामों की दिशा स्पष्ट होगी। रोज की आपूर्ति या घोषित पानी कटौती के बारे में संबंधित नगरपालिका की अलग सूचना लागू रहेगी।




