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Aurangzeb Controversy Breaking LIVE: मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में 17 मार्च को विभिन्न स्थानों पर आंदोलन का आयोजन

मुंबई और उसके उपनगरों में 17 मार्च 2025, सोमवार को विभिन्न स्थानों पर आंदोलन आयोजित किए जाएंगे, आंदोलन स्थल और समय इस प्रकार हैं:

Aurangzeb Controversy Breaking LIVE: मुंबई में 17 मार्च 2025 को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के बजरंग दल द्वारा ‘औरंगजेब की कब्र हटाओ आंदोलन’ का आयोजन किया जाएगा। यह आंदोलन आज़ाद मैदान, मुंबई में दोपहर 3:30 बजे शुरू होगा।

विश्व हिंदू परिषद के कोकण प्रांत द्वारा जारी प्रेस आमंत्रण के अनुसार, इस आंदोलन का उद्देश्य औरंगजेब के इतिहास को उजागर करना है। विहिप का कहना है कि औरंगजेब विदेशी आक्रांता बाबर का वंशज था, जिसने भारत में हिन्दू संस्कृति को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा, हजारों मंदिरों को तोड़ा और महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई।

मुंबई और उसके उपनगरों में 17 मार्च 2025, सोमवार को विभिन्न स्थानों पर आंदोलन आयोजित किए जाएंगे। आंदोलन स्थल और समय इस प्रकार हैं:

1️⃣ घाटकोपरयू वेलकम होटल, घाटकोपर पश्चिम, शाम 06:30 बजे
2️⃣ मुलुंडमुलुंड स्टेशन, बाटा शोरूम के पास, शाम 07:00 बजे
3️⃣ चेंबूरयूएस मान्टा, चेंबूर रेलवे स्टेशन के पास, शाम 06:00 बजे
4️⃣ वर्लीआईआईटी मेन गेट, पवई, शाम 06:30 बजे
5️⃣ पालघरपालघर तहसीलदार कार्यालय के सामने, सुबह 11:30 बजे
6️⃣ भायंदरतहसीलदार कार्यालय, मासेस मॉल के पीछे, सुबह 11:00 बजे
7️⃣ वसईसंकट मोचन हनुमान मंदिर, नालासोपारा पश्चिम, शाम 07:30 बजे
8️⃣ ओशिवारालोअर ओशिवारा मेट्रो स्टेशन, इंफिनिटी मॉल, अंधेरी पश्चिम, शाम 06:00 बजे
9️⃣ मालाडसोमया हनुमान मंदिर के पीछे, मलाड पश्चिम, शाम 06:30 बजे
🔟 बोरीवलीबोरीवली ईस्ट स्टेशन के पास, होटल सुरभि के सामने, शाम 08:00 बजे

इस आंदोलन के संयोजक श्रीराज नागर (सहमंत्री, विहिप, मुंबई) और नरेंद्र पुजारी (प्रचार प्रमुख, विहिप, कोकण प्रांत) हैं।

औरंगज़ेब की कब्र विवाद: इतिहास और वर्तमान की टकराहट

महाराष्ट्र में औरंगज़ेब की कब्र को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। यह मुद्दा समय-समय पर उभरता रहा है, खासकर जब ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर विचारधाराओं में टकराव होता है। औरंगज़ेब, जिसे मुगल साम्राज्य के सबसे कठोर शासकों में गिना जाता है, की कब्र महाराष्ट्र के खुल्दाबाद में स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार, उसने भारत में हिंदू मंदिरों के विध्वंस और जबरन धर्मांतरण जैसी नीतियां अपनाई थीं, जिससे कई वर्गों में उनके प्रति नकारात्मक भावनाएं बनी हुई हैं।

हाल ही में, हिंदूवादी संगठनों ने औरंगज़ेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि भारत में ऐसे विदेशी आक्रांताओं की कब्रों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जिन्होंने देश की संस्कृति और परंपराओं को नुकसान पहुंचाया। इस मुद्दे पर समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं, जहां कुछ लोग इसे इतिहास से छेड़छाड़ मानते हैं, तो कुछ इसे न्याय की दिशा में उठाया गया कदम बताते हैं।

महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन इस विवाद को सुलझाने के प्रयास में हैं, लेकिन यह मुद्दा बार-बार राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को जन्म देता है। औरंगज़ेब की कब्र केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि इतिहास और वर्तमान विचारधाराओं के बीच एक प्रतीकात्मक संघर्ष बन गई है।

इन आंदोलनों को लेकर प्रशासन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। आयोजकों और प्रशासन द्वारा लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

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