मुंबई | मेट्रो सिटी समाचार : मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर दूर ठाणे जिले के शहापूर तालुका में आदिवासी कातकरी एवं अन्य जनजातीय परिवारों के घरकुल लाभार्थियों की लंबित राशि तत्काल जारी करने की मांग विधानसभा में उठाई गई।
वसई की विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने विधानसभा के बजट सत्र में तारांकित प्रश्न क्रमांक 25282 के माध्यम से यह मुद्दा प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहद पिछड़े आदिवासी परिवारों ने सरकारी निर्णय पर भरोसा कर घर निर्माण शुरू किया, लेकिन तीसरी किस्त, मजदूरी और शौचालय निर्माण की राशि अब तक बड़ी संख्या में लंबित है।
‘जन-मन घरकुल योजना’ के तहत सहायता
राज्य सरकार द्वारा आदिम जनजातियों के लिए ‘जन-मन घरकुल योजना’ लागू की गई है। योजना के अनुसार प्रत्येक लाभार्थी को:
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घर निर्माण हेतु ₹2,00,000
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रोजगार हमी योजना के अंतर्गत मजदूरी ₹27,000
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शौचालय निर्माण हेतु ₹12,000
यानी कुल ₹2,39,000 की आर्थिक सहायता दी जानी है। घरकुल की राशि तीन चरणों में — ₹90,000, ₹90,000 और ₹20,000 — देने का प्रावधान है।
विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने सदन में बताया कि प्रति घरकुल लगभग ₹60,000 (तीसरी किस्त ₹20,000, मजदूरी ₹27,000 और शौचालय निधि ₹12,000) की राशि अभी भी लंबित है, जिसे तुरंत जारी किया जाना चाहिए।
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मंत्री का आश्वासन
इस पर आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक वुइके ने बताया कि मजदूरी की राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होनी है और निधि मिलते ही लाभार्थियों को वितरित की जाएगी।
चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राहुल नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि केंद्र से निधि प्राप्त करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और निश्चित समयसीमा में भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस विषय पर शीघ्र बैठक आयोजित कर लंबित राशि के भुगतान को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
स्थानीय संगठनों और श्रमजीवी संघटना ने भी मांग की है कि आदिवासी परिवारों को स्थायी आवास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द आर्थिक सहायता जारी की जाए।