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वसई-विरार मनपा के 5 साल के कामकाज पर सवाल, विपक्ष ने मांगी श्वेतपत्रिका और विशेष ऑडिट

Opposition leader Manoj Patil raises corruption allegations against Vasai Virar Municipal Corporation

विरार | मेट्रो सिटी समाचार: वसई-विरार महानगरपालिका के पिछले पांच वर्षों के प्रशासनिक कार्यकाल को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने दावा किया है कि इस अवधि में कई विकास परियोजनाओं में अनियमितताएं, वित्तीय गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। उन्होंने इन सभी मामलों की पारदर्शी जांच के लिए श्वेतपत्रिका जारी करने और विशेष लेखा परीक्षण कराने की मांग की है।

इस संबंध में मनोज पाटील ने 5 मार्च 2026 को महापौर अजीव पाटील और मनपा आयुक्त मनोजकुमार सूर्यवंशी को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है।

निविदा प्रक्रिया पर सवाल

विपक्ष का आरोप है कि मनपा द्वारा मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। बताया गया कि जिन ठेकेदारों पर पहले से मजदूरों के भविष्य निधि, बीमा और न्यूनतम वेतन से जुड़े मामलों में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोप थे, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

सुशोभीकरण परियोजनाओं पर भी विवाद

शहर के सौंदर्यीकरण के नाम पर भी बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि चार जलाशयों पर लाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए 6 करोड़ 75 लाख रुपये का खर्च प्रस्तावित किया गया, जबकि बाजार में इस तरह की व्यवस्था बहुत कम लागत में संभव थी। साथ ही इस कार्य के लिए आवश्यक तकनीकी मंजूरी और डिजाइन संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।

वाहन भत्ता और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल

मनोज पाटील ने यह भी आरोप लगाया कि कई अधिकारी वाहन भत्ता लेने के बावजूद नगर निगम के वाहनों का उपयोग निजी कामों के लिए कर रहे हैं। इससे निगम के खर्च में अनावश्यक बढ़ोतरी हो रही है।

संपत्ति कर वसूली में भी अनियमितता का आरोप

व्यावसायिक संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए निजी कंपनी को अनुबंध देने पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि निर्धारित दरों से अधिक भुगतान कर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

अनधिकृत निर्माण और कचरा प्रबंधन

शहर में अवैध निर्माण की संख्या तेजी से बढ़ने और कचरा प्रबंधन व्यवस्था में भी पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है। विपक्ष का दावा है कि इन मामलों में उचित कार्रवाई नहीं होने से नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

मनोज पाटील का कहना है कि यदि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।

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