विरार: छोटी बहन का फोन आया था। घर में आर्थिक परेशानी थी और उसे ₹10,000 की जरूरत थी। बड़ी बहन फाल्गुनी जोशी के मुताबिक, उन्होंने रकम दे दी थी। खेवणा बीच-बीच में फोन करके घर की मुश्किलें बताती थीं—दोनों भाई बीमार थे, उनकी देखभाल करनी थी और नौकरी भी छूट चुकी थी। उस मदद के बाद घर में क्या हुआ, फाल्गुनी नहीं जानतीं। अब उसी किराये के फ्लैट से खेवणा और उनके दोनों भाइयों के शव मिले हैं।

विरार पश्चिम के गार्डन के एवेन्यू में तीन भाई-बहनों की मौत के मामले में परिवार की बड़ी बहन की बातचीत से नई जानकारी सामने आई है। मृतकों में 52 वर्षीय दीपेश मेहता, 50 वर्षीय कुमार मेहता और उनकी छोटी बहन 48 वर्षीय खेवणा मेहता शामिल हैं। तीनों साथ रहते थे। पुलिस आत्महत्या की आशंका की जांच कर रही है, लेकिन मौत का कारण और पूरा घटनाक्रम अभी स्पष्ट होना बाकी है।

इस घर की ओर पड़ोसियों का ध्यान 28 और 29 अक्टूबर की दरम्यानी रात गया। बंद फ्लैट से तेज दुर्गंध आ रही थी। कुछ गड़बड़ होने की आशंका पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और फ्लैट खोला तो भीतर तीनों के शव मिले। इसके बाद एंबुलेंस बुलाई गईं और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए। शुरुआती पुलिस सूत्रों ने मौतें करीब छह दिन पहले हुई होने का अंदेशा जताया है। हालांकि, यह शुरुआती अनुमान है; सही समय चिकित्सकीय जांच से स्पष्ट होगा।

29 अक्टूबर को घटनास्थल पहुंचीं फाल्गुनी जोशी ने मेट्रो सिटी समाचार से बातचीत में बताया कि कुमार कई वर्षों से कैंसर से पीड़ित थे। बड़े भाई दीपेश को लकवा था। दोनों भाइयों की देखभाल की जिम्मेदारी खेवणा पर थी। फाल्गुनी के अनुसार, इसी जिम्मेदारी के कारण छोटी बहन को काम छोड़ना पड़ा और करीब एक से डेढ़ साल से वह नौकरी नहीं कर पा रही थीं।

परिवार के सामने इलाज के खर्च के साथ रोजमर्रा की जरूरतें भी थीं। फाल्गुनी के बयान के मुताबिक, नियमित कमाई नहीं होने से आर्थिक परेशानी बढ़ती गई। खेवणा फोन पर इन मुश्किलों का जिक्र करती थीं। बड़ी बहन ने बताया कि लंबे समय तक उनका परिवार से नियमित संपर्क नहीं रहा था, लेकिन हाल के दिनों में खेवणा उनसे बात करके अपनी स्थिति साझा करती थीं।

इसी दौरान खेवणा ने ₹10,000 की मदद मांगी थी। फाल्गुनी ने बताया कि उन्होंने पैसे दिए, लेकिन उनकी मदद परिवार की सभी जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने छोटी बहन को किसी ट्रस्ट से सहायता मांगने का सुझाव भी दिया था। इसके बाद खेवणा ने किसी संस्था से संपर्क किया या उन्हें कोई मदद मिली, इसकी जानकारी फाल्गुनी को नहीं है।

बड़ी बहन की बातचीत से बीमारी, देखभाल और आर्थिक संकट का सामना कर रहे परिवार की परिस्थितियां सामने आती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन परेशानियों का संबंध घटना से हो सकता है। हालांकि, परिवार का यह आकलन पुलिस जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं है। तीनों की मौत को किसी एक वजह से जोड़ने से पहले जांच के नतीजे सामने आना जरूरी है।

इस बीच पुलिस सूत्रों के हवाले से एक वीडियो मिलने की सूचना भी सामने आई है। वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें कथित तौर पर कही गई बातों की पुष्टि अभी बाकी है। इसलिए उसे तीनों की मौत की वजह बताने वाला प्रमाण नहीं माना जा सकता।

फिलहाल पुलिस बंद फ्लैट में हुई मौतों की परिस्थितियों की जांच कर रही है। फाल्गुनी के पास आखिरी कुछ बातचीत की याद और मदद मांगने वाले फोन की जानकारी है। लेकिन उसके बाद तीनों भाई-बहनों के साथ क्या हुआ, इसका जवाब उन्हें भी जांच से मिलने का इंतजार है।