विरार: नालासोपारा पूर्व में अवैध यात्री परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिस सिंह वाहिनी वाहतुक कामगार संघटना के आवेदन का पुलिस ने अपने आदेश में संदर्भ दिया था, अब उसी संगठन ने यातायात अधिकारियों पर कथित ‘हफ्ता’ लेकर चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। संगठन ने सोशल मीडिया पोस्ट में उड़नदस्ता गठित करने वाला वही पुलिस पत्र साझा किया है। इससे विरार यातायात शाखा के इस विशेष दस्ते की कार्यप्रणाली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

उपलब्ध पुलिस पत्र के मुताबिक, संगठन के 29 जुलाई 2026 के आवेदन के बाद 29 सितंबर को नालासोपारा पूर्व क्षेत्र के लिए चार सदस्यीय उड़नदस्ता नियुक्त किया गया था। पत्र वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश शेट्ये के हस्ताक्षर से पुलिस उपायुक्त, परिमंडल-3 विरार को भेजा गया था। अब करीब उसी प्रशासनिक आदेश को सार्वजनिक करते हुए संगठन ने यातायात विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

संगठन के आवेदन के बाद कैसे बना उड़नदस्ता?

मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय की यातायात शाखा-3, विरार के 29 सितंबर 2026 के पत्र में सिंह वाहिनी वाहतुक कामगार संघटना के 29 जुलाई के पत्र का संदर्भ दर्ज है। इसी पत्र में नालासोपारा पूर्व में अवैध यात्री परिवहन और यातायात नियमों के उल्लंघन पर नियमित कार्रवाई के लिए एक अधिकारी और तीन पुलिसकर्मियों की टीम बनाने की जानकारी दी गई है।

उड़नदस्ते को निजी वाहनों से कथित अवैध यात्री परिवहन, क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाले ऑटो रिक्शा, बिना वैध परमिट या बैज वाहन चलाने, अपात्र चालकों, अवैध ऑटो स्टैंड और अनधिकृत स्कूल परिवहन के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा दिया गया था। यानी जिस संगठन के आवेदन का पुलिस आदेश में उल्लेख है, उस पर कार्रवाई करते हुए यातायात शाखा ने अलग टीम तैनात की थी।

विरार यातायात शाखा-3 द्वारा 29 सितंबर 2026 को जारी उड़नदस्ता नियुक्ति का पुलिस पत्र
विरार यातायात शाखा-3 का 29 सितंबर 2026 का पत्र, जिसमें उड़नदस्ते की नियुक्ति और उसके कार्यक्षेत्र का उल्लेख है

अब उसी संगठन ने क्या आरोप लगाया?

सिंह वाहिनी वाहतुक कामगार संघटना ने “सिंह वाहिनी ऑटो टैक्सी यूनियन” नाम के सार्वजनिक Facebook समूह में यह पुलिस पत्र पोस्ट किया। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि यातायात विभाग में ऐसे अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं जो कथित रूप से “जिससे पॉकेट/हफ्ता लेते हैं, उसे ही टारगेट बनाते हैं।” संगठन ने इसके साथ वसई-विरार की व्यवस्था पर तंज भी किया है।

यह आरोप इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि उड़नदस्ता बनाने वाले पुलिस आदेश में इसी संगठन के पहले के आवेदन का संदर्भ मौजूद है। यानी अवैध यात्री परिवहन के खिलाफ विशेष कार्रवाई की मांग उठाने वाले संगठन ने ही अब उस कार्रवाई के तरीके पर पक्षपात और कथित वसूली का सवाल खड़ा किया है। संगठन की सार्वजनिक Facebook पोस्ट में हालांकि यह नहीं बताया गया कि कथित हफ्ता किस अधिकारी ने, किस वाहन चालक से, कब और कितनी रकम के रूप में लिया।

सिंह वाहिनी वाहतुक कामगार संघटना की Facebook पोस्ट का स्क्रीनशॉट
सिंह वाहिनी वाहतुक कामगार संघटना की पोस्ट, जिसमें पुलिस पत्र साझा कर यातायात विभाग की कार्रवाई पर आरोप लगाया गया है

आरोप में किसी अधिकारी का नाम नहीं

संगठन की पोस्ट में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया गया है। पोस्ट के साथ किसी पीड़ित वाहन चालक का बयान, भुगतान का रिकॉर्ड, शिकायत क्रमांक, ऑडियो-वीडियो या लेन-देन से जुड़ा दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोप फिलहाल संगठन का सार्वजनिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

पुलिस पत्र पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश शेट्ये के हस्ताक्षर आदेश जारी करने वाले अधिकारी के रूप में हैं। केवल पत्र पर हस्ताक्षर होने से पोस्ट में लगाया गया सामान्य आरोप व्यक्तिगत रूप से उनके खिलाफ साबित नहीं होता। संगठन की पोस्ट भी उन्हें या उड़नदस्ते के किसी सदस्य को नाम से आरोपित नहीं करती।

पुलिस का जवाब अभी सामने नहीं

खबर लिखे जाने तक उपलब्ध पुलिस पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट में यातायात शाखा-3 की ओर से संगठन के ताजा आरोपों पर कोई जवाब शामिल नहीं था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि संगठन ने कथित वसूली या चुनिंदा कार्रवाई को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या किसी अन्य सक्षम प्राधिकरण को अलग से औपचारिक शिकायत दी है या नहीं।

मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए उड़नदस्ते की तारीखवार कार्रवाई, चालान और रोके गए वाहनों की सूची, कार्रवाई के स्थान, संबंधित वाहन चालकों के बयान तथा संगठन की औपचारिक शिकायत का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा। यातायात शाखा का पक्ष सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि संगठन किन खास कार्रवाइयों को लेकर आपत्ति जता रहा है।

अंत में विश्लेषण: दस्तावेज क्या बताते हैं?

उपलब्ध रिकॉर्ड से दो बातें साफ हैं। पहली, 29 सितंबर का पुलिस पत्र नालासोपारा पूर्व में चार सदस्यीय उड़नदस्ता गठित किए जाने और उसमें सिंह वाहिनी के 29 जुलाई के आवेदन का संदर्भ होने की पुष्टि करता है। दूसरी, संगठन की Facebook पोस्ट साबित करती है कि उसी संगठन ने बाद में यातायात अधिकारियों पर कथित हफ्ता और चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया।

लेकिन पुलिस पत्र भ्रष्टाचार या वसूली का कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं करता और सोशल मीडिया पोस्ट अपने आरोप के समर्थन में कोई विशिष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं करती। इसलिए यह कहना सही होगा कि शिकायत से शुरू हुई पुलिस कार्रवाई अब शिकायतकर्ता संगठन के आरोपों के कारण विवाद में है; मगर किसी अधिकारी द्वारा हफ्ता लिए जाने को अभी स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। निष्पक्ष जांच के लिए दोनों पक्षों के रिकॉर्ड और आधिकारिक जवाब जरूरी हैं।

वसई-विरार की यातायात व्यवस्था के व्यापक संदर्भ के लिए मेट्रो सिटी समाचार की MBVV ट्रैफिक शाखा के लिए अलग DCP पद की मंजूरी और नालासोपारा-विरार में अवैध टेम्पो स्टैंड तथा ट्रैफिक जाम पर प्रकाशित रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।