नौ प्रभागों में मांगा गया जनप्रतिनिधियों की शिकायतों और कार्रवाई का ब्योरा; बोलिंज प्रभाग समिति ‘ए’ ने बताया—मांगी गई जानकारी अभिलेख में उपलब्ध नहीं, आठ प्रभागों के जवाब का इंतजार

वसई-विरार: “वसई-विरार में लगभग 50 प्रतिशत आबादी अवैध निर्माणों में रहती है। बीते 15 से 20 वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए हैं।” यह दावा करते हुए आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. भारतभूषण वर्मा ने वर्तमान जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़ा सवाल उठाया है—अवैध निर्माणों के खिलाफ आपके नगरसेवक क्या कर रहे हैं? क्या वे शिकायतों और निवेदनों के माध्यम से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, और उनके प्रयासों का महानगरपालिका के रिकॉर्ड में क्या ब्योरा मौजूद है?

इसी जानकारी के लिए डॉ. वर्मा ने, उनके मुताबिक, वसई-विरार शहर महानगरपालिका के सभी नौ प्रभागों में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किए हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में चुने गए 115 नगरसेवकों की अवैध निर्माणों के खिलाफ सक्रियता को दस्तावेजों के आधार पर समझना इस पहल का उद्देश्य है।

अब इनमें से प्रभाग समिति ‘ए’, बोलिंज का जवाब सामने आया है। कार्यालय ने बताया है कि अभिलेखों की जांच में मांगी गई जानकारी नहीं मिली, इसलिए सूचना उपलब्ध नहीं है। इस शुरुआती जवाब ने शिकायतों के रिकॉर्ड और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, बाकी आठ प्रभागों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं।

क्या जानकारी मांगी गई थी?

डॉ. वर्मा ने नगरसेवकों और नगरसेविकाओं द्वारा अपने संबंधित प्रभागों में अनधिकृत अथवा गैरकानूनी निर्माणों के खिलाफ महानगरपालिका को दी गई शिकायतों की सूची मांगी थी।

उपलब्ध RTI पत्र में तत्कालीन और वर्तमान, दोनों श्रेणियों के नगरसेवकों की शिकायतों का नगरसेवकवार तथा प्रभागवार ब्योरा मांगे जाने का उल्लेख है। इसमें जनप्रतिनिधि का नाम, प्रभाग क्रमांक, शिकायत की तारीख और प्राप्ति क्रमांक, संबंधित निर्माण का स्थान अथवा सर्वे नंबर शामिल है।

साथ ही, अभिलेख में उपलब्ध होने पर संबंधित विकासक या मालिक का नाम, शिकायत का स्वरूप, उसे किस विभाग अथवा अधिकारी के पास भेजा गया और शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई—इसकी जानकारी भी मांगी गई है।

बोलिंज प्रभाग ने अपने जवाब में क्या कहा?

23 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में बोलिंज प्रभाग समिति ‘ए’ के जनसूचना अधिकारी तथा सहायक आयुक्त विजय शिंदे ने अनधिकृत निर्माण विभाग के अभिलेखों की जांच का उल्लेख किया है।

जवाब का हिंदी आशय है कि मांगी गई जानकारी अभिलेख के रूप में नहीं मिली, इसलिए सूचना उपलब्ध नहीं है।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। पत्र में यह सीधे नहीं कहा गया है कि वर्तमान नगरसेवकों ने कोई शिकायत की ही नहीं है। कार्यालय ने संबंधित जानकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने की बात कही है। शिकायत नहीं होना और उसकी जानकारी उपलब्ध नहीं होना—इन दोनों स्थितियों का अर्थ अलग है।

क्या बोलिंज क्षेत्र में अवैध निर्माण नहीं हुए? कार्रवाई का रिकॉर्ड कहां है?

इस जवाब के बाद डॉ. वर्मा ने सवाल उठाया है कि क्या पिछले दो वर्षों में बोलिंज प्रभाग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में कोई अवैध निर्माण नहीं हुआ? यदि अवैध निर्माण हुए हैं, तो उनके खिलाफ जनप्रतिनिधियों की शिकायतों और कार्रवाई की मांग का ब्योरा कहां है?

वह यह भी सवाल उठाते हैं कि इस अवधि में महानगरपालिका ने अवैध निर्माणों या अतिक्रमण के खिलाफ क्या कार्रवाई की और उसका रिकॉर्ड क्या बताता है?

इन सवालों का उत्तर उपलब्ध RTI पत्र से नहीं मिलता। यह आवेदन नगरसेवकों द्वारा की गई शिकायतों और उन पर कार्रवाई के विवरण से संबंधित है। इसलिए इस जवाब से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रभाग में कोई अवैध निर्माण नहीं हुआ या महानगरपालिका ने कोई कार्रवाई नहीं की। इन दोनों मुद्दों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित निर्माणों और विभागीय कार्रवाई के अलग रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।

आपके नगरसेवक की सक्रियता का आकलन दस्तावेजों से हो

डॉ. वर्मा के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य यह समझना है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ वर्तमान नगरसेवक सक्रिय हैं या इस विषय पर मौन हैं। उनका कहना है कि शिकायतों, निवेदनों और कार्रवाई के अभिलेख सामने आने से जनप्रतिनिधियों की भूमिका अधिक स्पष्ट होगी।

नागरिकों के लिए भी यह सवाल महत्वपूर्ण है कि यदि उनके प्रभाग में अवैध निर्माण जारी हैं, तो उनके निर्वाचित नगरसेवक इस संबंध में क्या कदम उठा रहे हैं? क्या उन्होंने महानगरपालिका को लिखित शिकायत दी है? क्या कार्रवाई की मांग की है? और प्रशासन ने उस पर क्या जवाब दिया?

फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज से किसी नगरसेवक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। शिकायत का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने मात्र से अवैध निर्माणों को समर्थन देने या मिलीभगत का आरोप भी सिद्ध नहीं होता। जनप्रतिनिधियों की भूमिका का आकलन संबंधित दस्तावेजों और उनके पक्ष के आधार पर ही होना चाहिए।

बाकी आठ प्रभागों के जवाब से क्या तस्वीर सामने आएगी?

डॉ. वर्मा का कहना है कि अभी नौ प्रभागों में से केवल एक का जवाब मिला है। बाकी आठ प्रभागों से सूचना मिलने के बाद शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की तुलनात्मक स्थिति सामने आ सकेगी। उन्होंने आने वाले जवाबों में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की संभावना जताई है।

फिलहाल बोलिंज प्रभाग का जवाब एक जरूरी सवाल छोड़ता है—अवैध निर्माणों के खिलाफ आपके नगरसेवक द्वारा किए गए प्रयासों का रिकॉर्ड कहां है? बाकी प्रभागों के जवाब और संबंधित विभागों के दस्तावेज सामने आने पर ही इस सवाल की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।