लखनऊ/आगरा: आगरा मंडल शिक्षक विधान परिषद चुनाव में मतदान केंद्रों की निगरानी में चूक के मामले में चुनाव आयोग ने छह अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें दो सेक्टर मजिस्ट्रेट और चार पुलिसकर्मी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संबंधित केंद्रों पर निगरानी और मतदान केंद्र के अंदर-बाहर नियंत्रण बनाए रखने में गंभीर कमियां पाई गई थीं।
सैंया और फतेहाबाद में तैनात अधिकारियों पर कार्रवाई
सैंया स्थित क्षेत्र पंचायत कार्यालय में चुनाव ड्यूटी करने वाले सेक्टर मजिस्ट्रेट ओपी चक, सेक्टर पुलिस अधिकारी हरिशरण सिंह और उपनिरीक्षक संदीप कुमार इस कार्रवाई के दायरे में हैं। फतेहाबाद स्थित क्षेत्र पंचायत कार्यालय में तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट विशाल राठौर, अतिरिक्त निरीक्षक पुरुषोत्तम पाल और उपनिरीक्षक सुमित त्यागी के निलंबन के भी निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा है। छह अधिकारियों के आरोपपत्र के मसौदे तैयार कर दस दिन के भीतर आयोग के परीक्षण के लिए भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। निलंबन और विभागीय जांच प्रशासनिक कार्रवाई हैं; इन्हें किसी आपराधिक मामले में अदालत से दोष सिद्ध होना नहीं माना जाना चाहिए।
21 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्यवाही
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बयान में दो पीठासीन अधिकारियों, तीन मतदान अधिकारियों, पांच हेड कांस्टेबल और 11 कांस्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश का भी उल्लेख है। इस तरह छह पर्यवेक्षण अधिकारियों के अलावा 21 अन्य चुनाव ड्यूटी कर्मचारियों की भूमिका पर कार्रवाई की प्रक्रिया चलेगी। आगे की जिम्मेदारी तय करने में जांच के निष्कर्ष और विभागीय प्रक्रिया अहम होगी।
तीन केंद्रों पर दोबारा मतदान क्यों कराया गया
23 अक्टूबर को हुए मूल मतदान में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद तीन केंद्रों का मतदान रद्द कर पुनर्मतदान का निर्णय लिया गया था। इनमें खेरागढ़ के तहसील परिसर का केंद्र संख्या 20, सैंया के क्षेत्र पंचायत कार्यालय का केंद्र संख्या 21 और फतेहाबाद के क्षेत्र पंचायत कार्यालय का केंद्र संख्या 26 शामिल थे।
इन तीन केंद्रों पर 26 अक्टूबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक फिर वोट डाले गए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, पुनर्मतदान शांतिपूर्ण रहा। आयोग ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जिन कर्मचारियों की भूमिका के कारण दोबारा मतदान की जरूरत पड़ी, उन्हें पुनर्मतदान की जिम्मेदारी नहीं दी जाए।
अब आगे क्या
इस मामले में अगला कदम आरोपपत्र और विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया है।




